वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनी ‘मन की बात’, अपनों के साथ साझा किए आत्मीय पल
प्रधानमंत्री के संदेश में महिला सशक्तिकरण, जैविक खेती, स्वच्छता और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने पर जोर
रायपुर। उम्र के जिस पड़ाव पर अपनों के साथ और आत्मीय संवाद की सबसे अधिक जरूरत होती है, वहां बुजुर्गों के बीच बैठकर उनके साथ समय बिताना अपने आप में संवेदनशील पहल है। कुछ ऐसा ही दृश्य रायपुर की मानव बस्ती स्थित शासकीय वृद्धाश्रम में देखने को मिला, जहां महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने वृद्धजनों के साथ बैठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का 139वां संस्करण सुना।कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने देश की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रगति से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। उनके संदेश में नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका, प्राकृतिक खेती, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों के उपयोग और युवाओं की सकारात्मक भागीदारी प्रमुख रूप से शामिल रही।प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए बताया कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से धरती को बचाने में महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। खेती-किसानी से लेकर आजीविका के साधनों तक उनकी बढ़ती भागीदारी न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता खोल रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
दीपावली और त्योहारों के उल्लास के बीच प्रधानमंत्री ने देशवासियों से स्थानीय कारीगरों, छोटे कारोबारियों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश के जरिए उन्होंने भारतीय उत्पादों को अपनाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बात कही। साथ ही, त्योहारों की खुशियों के बीच स्वच्छता बनाए रखने और प्रदूषण कम करने का आह्वान भी किया। युवाओं और जेन-ज़ी की सकारात्मक सोच तथा सामाजिक भागीदारी पर भी चर्चा हुई।
‘मन की बात’ को देश की सामूहिक चेतना और जनभागीदारी से जोड़ने वाला मंच बताते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों के साथ अपने आत्मीय जुड़ाव का उल्लेख किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों की उपलब्धियों, प्रयासों और प्रेरक कार्यों को व्यापक पहचान मिलती है।वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ कार्यक्रम सुनने की यह पहल सामाजिक सरोकारों और वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है। महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण की रक्षा, स्वच्छता और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने जैसे विषय तभी जनआंदोलन का रूप ले सकते हैं, जब समाज का हर वर्ग इन प्रयासों से जुड़े।
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