मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के आतिथ्य में सूरजपुर का राज्योत्सव भव्यता के साथ संपन्न, छत्तीसगढ़ की संस्कृति और विकास की दिखी झलक
राज्य स्थापना दिवस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने किया जिला स्तरीय समारोह का शुभारंभ, बोलीं- छत्तीसगढ़ महतारी की अस्मिता, स्वाभिमान और विरासत का प्रतीक है यह पर्व
‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ की थीम पर आयोजन, मेधावी प्रतिभागियों, उत्कृष्ट अधिकारी-कर्मचारियों को मिला सम्मान; पारंपरिक व्यंजनों और लोकनृत्य ने बांधा समां
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ की माटी की महक, लोकजीवन की सहजता और आदिवासी परंपराओं की समृद्ध विरासत मंगलवार को सूरजपुर के अग्रसेन स्टेडियम में एक साथ जीवंत हो उठी। मंच पर थिरकते कदमों से कर्मा नृत्य की छटा बिखरी तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ी पकवानों की खुशबू ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। स्कूली बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियों और कलाकारों की सुरीली आवाजों के बीच प्रदेश के 26वें स्थापना दिवस पर जिला स्तरीय राज्योत्सव उत्साहपूर्वक आयोजित हुआ।महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस समारोह की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ रखी गई। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात राज्यगीत का सामूहिक गायन किया गया। पूरा वातावरण अपनी माटी और अपनी पहचान के प्रति गौरव की अनुभूति से सराबोर नजर आया।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने राज्य निर्माण के पुरखों को किया नमन
उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का जन्म केवल एक नए राज्य के गठन की घटना नहीं, बल्कि यहां के लोगों की वर्षों पुरानी आकांक्षाओं और संघर्षों की परिणति है। यह अवसर छत्तीसगढ़ महतारी की अस्मिता, सांस्कृतिक वैभव और स्वाभिमान को स्मरण करने का है।उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य का गौरव मिला। प्रदेश अब अपने 26 वर्ष पूर्ण कर 27वें साल में कदम रख रहा है। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद राज्य ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।मंत्री ने बताया कि लोककला, जनजातीय परंपराएं और सांस्कृतिक विविधता छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदायों के उत्थान के लिए भी विभिन्न प्राधिकरणों के जरिए पहल की जा रही है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विकसित सूरजपुर के लिए मांगा जनसहयोग
जिले की संभावनाओं और सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सूरजपुर की जनजातीय विरासत को संरक्षित रखना समय की जरूरत है। विकास की गति तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक गांव और समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिले। उन्होंने नागरिकों से साझा जिम्मेदारी निभाने तथा जिले को समृद्ध बनाने के प्रयासों में भागीदार बनने की अपील की।
प्रेमनगर विधायक श्री भूलन सिंह मरावी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ का संदेश महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और युवाओं की क्षमताओं को नए अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ और प्रगतिशील सूरजपुर के निर्माण में सामूहिक योगदान देने का आग्रह किया।कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने जिले में हुए विकास कार्यों, उपलब्धियों और प्रशासनिक नवाचारों की जानकारी प्रस्तुत की।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने उत्कृष्ट कर्मियों और प्रतियोगिता विजेताओं को किया पुरस्कृत
समारोह में अपने कार्यक्षेत्र में सराहनीय योगदान देने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों तथा पुलिस विभाग के कर्मियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। पाक कला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल करने वाली बबली को 3,100 रुपये, द्वितीय स्थान पर रहीं श्रीमती रानी गुप्ता को 2,100 रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली श्रीमती कमला गुप्ता को 1,100 रुपये की पुरस्कार राशि के साथ प्रमाण पत्र दिया गया।विभागीय प्रदर्शनी में जिला पंचायत ने पहला स्थान प्राप्त किया। स्वास्थ्य विभाग दूसरे तथा शिक्षा एवं राजस्व विभाग संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे। विजेता इकाइयों को अतिथियों ने सम्मानित किया।इसके अतिरिक्त शासकीय हितग्राहीमूलक योजनाओं के पात्र लोगों को विभिन्न लाभ सौंपे गए। कुर्सी दौड़ और रस्साकशी जैसी मनोरंजक स्पर्धाओं में सफल प्रतिभागियों को भी पुरस्कार दिए गए। मंच पर सम्मान प्राप्त करते लोगों के चेहरों पर खुशी और बच्चों के प्रदर्शन में दिखता आत्मविश्वास समारोह के खास दृश्य रहे।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पारंपरिक व्यंजनों का लिया स्वाद, विभागीय स्टॉलों का जाना हाल
आयोजन स्थल पर लगी पाक कला प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ी खान-पान की विविधता आकर्षण का केंद्र बनी रही। स्थानीय व्यंजनों की साज-सज्जा और स्वाद ने आगंतुकों को प्रभावित किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने जनप्रतिनिधियों के साथ पकवानों का जायका लिया तथा प्रतिभागियों के हुनर की प्रशंसा की।उन्होंने विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं के क्रियान्वयन, उपलब्धियों और नए प्रयोगों की जानकारी हासिल की। प्रदर्शनी में जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के जरिए जिले में हो रहे बदलावों को दर्शाया गया।
कर्मा नृत्य की थाप पर झूमे दर्शक, स्कूली बच्चों ने दिखाई प्रतिभा
सांस्कृतिक संध्या में विद्यार्थियों ने आकर्षक नृत्य और अन्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का ध्यान खींचा। कर्मा नृत्य के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकजुटता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया। आमंत्रित कलाकारों ने लोकगीतों तथा पारंपरिक संगीत की प्रस्तुतियों से वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम में बच्चों की सहज अभिव्यक्ति और कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने तालियों से सराहा। इन रंगों के बीच छत्तीसगढ़ की उस पहचान का दर्शन हुआ, जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोकगीतों, नृत्यों, खान-पान और रीति-रिवाजों के माध्यम से आगे बढ़ रही है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की रही सहभागिता
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा लाल राजवाड़े, प्रेमनगर विधायक श्री भूलन सिंह मरावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासनिक पक्ष से कलेक्टर श्रीमती रेना जमील, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल, जिला पंचायत सीईओ श्री विजेंद्र पाटले तथा अपर कलेक्टर श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। समारोह के समापन पर जिला प्रशासन की ओर से मंत्री एवं आमंत्रित अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।
विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी के सपनों को उड़ान देने का संदेश
सूरजपुर में आयोजित इस राज्योत्सव ने एक ओर प्रदेश के गौरवशाली अतीत को याद किया तो दूसरी ओर भविष्य की उम्मीदों को मंच दिया। महिलाओं की भागीदारी, युवाओं की प्रतिभा, कर्मचारियों का योगदान और स्थानीय संस्कृति की प्रस्तुतियां इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण बने।
छत्तीसगढ़ की पहचान यहां के प्राकृतिक संसाधनों के साथ उन लोगों से भी है, जिनकी मेहनत और परंपराओं ने इस धरती को विशिष्ट बनाया है। ऐसे में विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए अपनी जड़ों को बचाए रखना भी उतना ही जरूरी है। यही भावना राज्य स्थापना दिवस के इस आयोजन से उभरकर सामने आई।
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