बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी, विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट और साइबर सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

Oct 26, 2026 - 16:31
0 3
बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी, विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट और साइबर सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी, विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट और साइबर सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

सूरजपुर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विधिक जागरूकता कार्यक्रम, न्यायिक मजिस्ट्रेट हिमांशु पण्डा ने बताए बच्चों के अधिकार और सुरक्षा के कानूनी प्रावधान

सूरजपुर। बचपन किसी भी बच्चे के जीवन का सबसे अनमोल दौर होता है। इस उम्र में बच्चों को स्नेह, सुरक्षा और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है, ताकि वे बिना किसी भय के अपने सपनों को आकार दे सकें। इसी संवेदनशील जिम्मेदारी को केंद्र में रखते हुए सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को सूरजपुर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण, अपने अधिकारों की समझ और इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षित रहने के तरीकों से अवगत कराया गया।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के दिशा-निर्देशों पर संचालित इस अखिल भारतीय अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों से परिचित कराने के साथ ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां वे किसी भी तरह के शोषण या अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठा सकें। अभियान की थीम ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार’ रखी गई है। इसका मूल संदेश भी स्पष्ट है कि हर बच्चे का बचपन सुरक्षित रखना केवल परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में उपस्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री हिमांशु पण्डा ने विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 यानी पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की सरल भाषा में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों के महत्व को समझाते हुए बताया कि किसी भी अनुचित व्यवहार को चुपचाप सहना जरूरी नहीं है। ऐसी स्थिति में भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित प्राधिकरण से सहायता लेना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बदलते डिजिटल परिवेश में साइबर सुरक्षा की जरूरत पर भी जोर दिया। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल करने, ऑनलाइन अनजान व्यक्तियों से सतर्क रहने तथा इंटरनेट पर निजी जानकारी साझा करने से बचने की सलाह दी गई। डिजिटल दुनिया में छोटी-सी असावधानी भी परेशानी का कारण बन सकती है, इसलिए जागरूकता और सतर्कता को अपनी आदत बनाना जरूरी है।

इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली, जरूरतमंदों को मिलने वाली कानूनी सहायता और आम नागरिकों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि पात्र जरूरतमंद व्यक्ति निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए नालसा की टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100 की जानकारी देते हुए कानूनी मदद हासिल करने का रास्ता समझाया गया।अभियान के प्रथम चरण में 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक एक सप्ताह का गहन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके बाद दूसरे चरण में 12 नवंबर 2026 से नवंबर 2027 तक विद्यालयों में क्षमता निर्माण और जागरूकता संबंधी गतिविधियां निरंतर आयोजित की जाएंगी, ताकि बच्चों में अपने अधिकारों की समझ विकसित हो और बाल संरक्षण को लेकर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा मिले।

यह आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सूरजपुर के अध्यक्ष श्री थॉमस एक्का के मार्गदर्शन और प्राधिकरण की सचिव सुश्री पायल टोपनो के निर्देशन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री सुनील कुजूर, वरिष्ठ एवं प्रभारी शिक्षक श्री ओमप्रकाश राजवाड़े तथा पैरालीगल वॉलंटियर्स श्री सत्य नारायण और श्री उमेश कुमार राजवाड़े उपस्थित रहे।कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बच्चों को सुरक्षित रखना केवल कानून लागू करने वाली संस्थाओं का दायित्व नहीं है। परिवार, विद्यालय और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी संवेदनशीलता विकसित करनी होगी, जिसमें बच्चे बिना डर अपनी बात कह सकें और जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर सहायता मिल सके। क्योंकि सुरक्षित बचपन ही आत्मविश्वास से भरे भविष्य की पहली नींव है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
tiwarivickey

Freedom news writer

Comments (0)

User