16वें वित्त आयोग की राशि में बंदरबांट का आरोप, जनपद पंचायत रामानुजनगर में वित्तीय अनियमितता पर कांग्रेस ने खोला मोर्चा

Nov 02, 2026 - 16:50
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16वें वित्त आयोग की राशि में बंदरबांट का आरोप, जनपद पंचायत रामानुजनगर में वित्तीय अनियमितता पर कांग्रेस ने खोला मोर्चा

8.514 लाख रुपये के कार्यों में नियमों की अनदेखी का आरोप, सात दिनों में जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो 10 नवंबर को जनपद कार्यालय के सामने होगा धरना-प्रदर्शन

सूरजपुर।गांवों के विकास के लिए स्वीकृत सरकारी धनराशि का सही इस्तेमाल हो, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े, लेकिन जब विकास के नाम पर आवंटित राशि के उपयोग पर ही सवाल खड़े होने लगें तो व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।  जिले के जनपद पंचायत रामानुजनगर में 16वें वित्त आयोग की वर्ष 2026-27 की स्वीकृत कार्ययोजना को लेकर ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां कांग्रेस ने वित्तीय अनियमितता और कार्यों की बंदरबांट का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से शिकायत की है।जिला कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी अविनाश साहू सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा 2 नवंबर 2026 को प्रस्तुत शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जनपद पंचायत रामानुजनगर के मुख्यालय परिसर में कराए जाने वाले कुछ कार्यों को नियमानुसार जनपद स्तर पर स्वीकृत कराने के बजाय ग्राम पंचायत कौशलपुर के खाते में शामिल कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने इसे वित्तीय प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र से जुड़ी गंभीर अनियमितता बताया है।शिकायत के मुताबिक, 16वें वित्त आयोग की स्वीकृत कार्यसूची में क्रमांक 35 पर जनपद पंचायत रामानुजनगर मुख्यालय स्थित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कक्ष का शौचालय निर्माण 45 हजार 200 रुपये की लागत से ग्राम पंचायत कौशलपुर के अंतर्गत दर्शाया गया है। इसी तरह क्रमांक 75 में जनपद पंचायत भवन के लिए 5 लाख रुपये तथा क्रमांक 76 में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कक्ष के लिए 3 लाख 6 हजार 200 रुपये की राशि भी उसी ग्राम पंचायत के माध्यम से स्वीकृत दर्शाई गई है। इन तीनों कार्यों की कुल राशि 8 लाख 51 हजार 400 रुपये बताई गई है।कांग्रेस का कहना है कि जनपद पंचायत का मुख्यालय परिसर प्रशासनिक रूप से जनपद स्तर की संपत्ति है। ऐसे में वहां होने वाले निर्माण कार्यों को किसी ग्राम पंचायत की एजेंसी के माध्यम से कराना नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया से वास्तविक जरूरत वाले गांवों के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। जिन पंचायतों को पेयजल, नाली, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की दरकार है, वहां की जरूरतों के मुकाबले मुख्यालय परिसर के कार्यों को प्राथमिकता दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।मामले को गंभीर बताते हुए शिकायतकर्ताओं ने भारतीय न्याय संहिता 2023, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 तथा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी राशि जनता की अमानत है। इसके उपयोग में किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।जिला प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखते हुए कांग्रेस ने संबंधित कार्यों की तत्काल उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, 8.514 लाख रुपये की राशि से जुड़े कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी अनुमोदन, निविदा प्रक्रिया, आवंटन और भुगतान की जांच पूरी होने तक भुगतान पर रोक लगाने तथा जनपद मुख्यालय के निर्माण कार्यों को ग्राम पंचायत की एजेंसी से कराए जाने के औचित्य की पड़ताल करने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई है।

सात दिन का अल्टीमेटम, फिर सड़क पर उतरने की चेतावनी

शिकायत में प्रशासन को सात दिनों के भीतर पारदर्शी और ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। ऐसा नहीं होने पर 10 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे सुभाष चौक, रामानुजनगर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद जनपद कार्यालय तक लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन किए जाने की बात भी कही गई है। शिकायत की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर एवं रामानुजनगर थाना प्रभारी को भी भेजी गई है।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और सरकारी धनराशि के उपयोग को लेकर उठे सवालों की जांच किस नतीजे तक पहुंचती है। ग्रामीण विकास के लिए आने वाला प्रत्येक रुपया गांवों की उम्मीदों से जुड़ा होता है। ऐसे में जरूरी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, सच्चाई सामने आए और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। क्योंकि विकास की योजनाओं का वास्तविक लाभ कागजों तक सीमित रहने के बजाय उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिनके जीवन में बदलाव लाने के लिए ये योजनाएं बनाई जाती हैं।

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tiwarivickey

Freedom news writer

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