17वें वार्षिकोत्सव पर सजेगा मां काली का दरबार, तीन दिनों तक गूंजेंगे जयकारे
8 नवंबर की मध्यरात्रि होगी मां काली की पूजा, महाभंडारा, भगवती जागरण और गरबा महोत्सव भी बनेगा आकर्षण
सूरजपुर। आस्था के दीप जब एक साथ जलते हैं, तो केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि लोगों के मन भी भक्तिभाव से आलोकित हो उठते हैं। मां काली की आराधना से जुड़ी ऐसी ही धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सूरजपुर में श्री श्री सार्वजनिक मां काली पूजा समिति अपने 17वें वार्षिकोत्सव की तैयारियों में जुट गई है। भैयाथान रोड स्थित पंचमंदिर पारा की दुर्गा बाड़ी में इस वर्ष भी कालरात्रि मां काली की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ की जाएगी। आयोजन को भव्य स्वरूप देने के लिए पंडाल निर्माण से लेकर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।इसी सिलसिले में रविवार को अग्रसेन भवन में समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा तय करने के साथ व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को सौंपी गई। समिति के लिए यह आयोजन केवल वार्षिक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि 17 वर्षों से चली आ रही आस्था, सामूहिक सहयोग और सामाजिक एकजुटता की परंपरा का प्रतीक भी है।
मध्यरात्रि में होगी मां काली की विशेष पूजा
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार, 8 नवंबर को दोपहर 3 बजे कलश स्थापना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ होगा। शाम 4 बजे शिव तांडव और साढ़े पांच बजे चंडी पाठ किया जाएगा। इसके बाद रात्रि 11 बजे से मां काली की विशेष पूजा प्रारंभ होगी। रात्रि 2 बजे देवी अभिषेक, प्रातः 3 बजे दीपदान एवं बलिदान तथा सुबह 4 बजे पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। साढ़े चार बजे माता रानी को महाभोग लगाने के बाद हवन और आरती संपन्न होगी।
कन्या पूजन, भंडारा और गरबा महोत्सव से सजेगी संध्या
सोमवार, 9 नवंबर को शाम 7 बजे महाआरती के पश्चात कन्या पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन होगा। इसके साथ ही महाकाली भंडारा, माता को चुनरी भेंट करने का कार्यक्रम, भगवती जागरण और गरबा महोत्सव श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। मंगलवार, 10 नवंबर को सिंदूर दान के बाद मां काली की प्रतिमा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली जाएगी।तीनों दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करने और उत्सव में सहभागी बनने का अवसर मिलेगा।
आयोजन की जिम्मेदारियां सौंपी गईं
कार्यक्रम के सुचारु संचालन के लिए समिति ने पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है। संरक्षक के रूप में रामकृष्ण ओझा, चंचलेश श्रीवास्तव, मुकेश गर्ग और पवन मित्तल को शामिल किया गया है। रूपेश मित्तल अध्यक्ष, रामजी साहू, आशीष गुप्ता एवं संजीत गुप्ता उपाध्यक्ष, संजय गर्ग और कृष्णमंगल हरिओम अग्रवाल कोषाध्यक्ष तथा अजय सिंह और आशिक सोनी बाबू सचिव बनाए गए हैं।प्रविण साहू एवं विक्की साहू को सहसचिव की जिम्मेदारी मिली है। प्यारे साहू, सुमित मित्तल, राकेश महाराज और नितेश गुप्ता व्यवस्थापक बनाए गए हैं। पूजा प्रमुख के रूप में विकास साहू और स्पर्श श्रीवास्तव को दायित्व सौंपा गया है।9 नवंबर को होने वाले विशाल भंडारे की व्यवस्था के लिए रामबिलास मित्तल, पूनम गर्ग, दिनेश गुप्ता, सुंदरलाल पाटकर, निरंकार सिंह चौहान और भोला साहू को भंडारा प्रमुख बनाया गया है।समिति के सदस्य शंकर अग्रवाल, मनोज सोनी, राकेश जायसवाल, राकेश महाराज, मयंक तिवारी, अमन ठाकुर, संदीप ठाकुर, लाला साहू, शुभम अग्रवाल, मित गुप्ता, नवीन गुप्ता, वीरू गुप्ता, दीपक साहू, अद्वैत मित्तल, अंशुल अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, अंकुर तिवारी, ओमकार सोनी, महादेव साहू, रोहित सिंह, दीपक साहू पिंटू, प्रवीण गोयल, गोलू पाण्डेय, कृष्णा गुप्ता, ऋषभ जैन, नितिन सोनी, वंश अग्रवाल और काशवी मित्तल सहित अन्य सदस्य तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं।
17 वर्षों से आस्था का केंद्र बना आयोजन
सूरजपुर में पिछले 17 वर्षों से सार्वजनिक रूप से मां काली पूजा का आयोजन किया जा रहा है। समय के साथ यह धार्मिक उत्सव नगर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गया है। हर वर्ष शहर के साथ जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने पहुंचते हैं।कुलमिलाकर मां की आराधना से जुड़ा यह उत्सव लोगों को भक्ति के साथ आपसी मेल-जोल और सामाजिक सहभागिता का संदेश भी देता है। आयोजन की तैयारियों में समिति के सदस्यों के साथ सहयोगी संस्था श्री बाल गणेश पूजा समिति के सदस्य भी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। समिति को उम्मीद है कि इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की भागीदारी से मां काली का दरबार भक्तिमय वातावरण में सजेगा और पूरा क्षेत्र जयकारों से गूंज उठेगा।
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