सुरक्षित बचपन का संदेश लेकर कस्तूरबा विद्यालय पहुंचा विधिक जागरूकता अभियान, छात्राओं को बताए अधिकार और सुरक्षा के कानूनी उपाय
पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह निषेध और साइबर अपराधों पर दी गई जानकारी, बाल विवाह रोकने के लिए विद्यार्थियों ने ली शपथ
सूरजपुर। बचपन किसी भी बच्चे के जीवन का सबसे खूबसूरत और अनमोल हिस्सा होता है। इस उम्र में बच्चों को सपनों के साथ सुरक्षा, विश्वास और सम्मान की भी जरूरत होती है। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव, सामाजिक कुरीतियों और अपराधों के चलते उनका यही बचपन असुरक्षित हो जाता है। बच्चों को ऐसे खतरों से बचाने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, सूरजपुर में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई। अभियान के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किसी भी तरह का शोषण, भेदभाव अथवा बाल अधिकारों का हनन चुपचाप सहने की मजबूरी नहीं है। कानून उनकी सुरक्षा के लिए मौजूद है और जरूरत पड़ने पर सहायता मांगना उनका अधिकार है।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह अभियान 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रथम चरण में संचालित किया जा रहा है। इसके बाद 12 नवंबर 2026 से नवंबर 2027 तक इसका अगला चरण चलेगा। ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार’ थीम पर आधारित इस पहल का मूल संदेश है कि हर बच्चे का बचपन सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके अंतर्गत स्कूली विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षा, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और निःशुल्क विधिक सहायता की उपलब्धता से भी परिचित कराया जा रहा है।
कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल, सीएमजीजीएफ कुमारी शिखा जायसवाल, पैरालीगल वॉलंटियर सत्यनारायण तथा सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक विनीता सिन्हा ने मुख्य वक्ता के रूप में अपनी सहभागिता निभाई।
बच्चों को संबोधित करते हुए मनोज जायसवाल ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 यानी पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों को सहज भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए समझाया। उन्होंने गुड टच और बैड टच के बीच अंतर बताते हुए कहा कि बच्चों को अपने शरीर की सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए। किसी का व्यवहार असहज महसूस हो तो उसे नजरअंदाज करने अथवा डरकर चुप रहने के बजाय अपने अभिभावक, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम, साइबर अपराधों से बचाव और बाल विवाह प्रतिषेध कानून के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के दुष्परिणामों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित करता है। इसे रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों के साथ समाज और परिवार की जागरूकता भी जरूरी है। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी संकटपूर्ण परिस्थिति में बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं और विधिक सहायता सेवाओं का सहयोग कैसे प्राप्त किया जा सकता है।
वहीं, कुमारी शिखा जायसवाल ने विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर कैरियर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने पढ़ाई के प्रति गंभीरता बनाए रखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह आधार है, जिसके सहारे बच्चे अपने सपनों को साकार कर आत्मनिर्भर भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों ने बाल विवाह के विरुद्ध संयुक्त रूप से शपथ ली। इस संकल्प के जरिए कम उम्र में विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने और बच्चों को शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर विद्यालय की अधीक्षिका सुमन वर्मा, चंदा प्रजापति, सखी वन स्टॉप सेंटर की काउंसलर, तुलसी झा सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम ने एक जरूरी सामाजिक संदेश भी छोड़ा कि बच्चों को केवल किताबों में अधिकार पढ़ाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें इतना जागरूक और आत्मविश्वासी बनाना भी जरूरी है कि वे अपने साथ होने वाले गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठा सकें। आखिरकार, सुरक्षित बचपन ही एक बेहतर समाज और मजबूत भविष्य की पहली नींव है।
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