पत्नी की हत्या के मामले में पति को आजीवन उम्रकैद, शराबखोरी और चरित्र पर संदेह बना पारिवारिक कलह की वजह: फास्ट ट्रैक न्यायालय का फैसला, संतानों को क्षतिपूर्ति देने की अनुशंसा
सूरजपुर। पत्नी की हत्या के मामले में करीब चार वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 27 अक्टूबर 2026 को फास्ट ट्रैक न्यायालय ने आरोपी पति जगदीश पैंकरा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उस पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। शराबखोरी, चरित्र पर संदेह और घरेलू विवाद से शुरू हुई कहानी का अंत एक परिवार के उजड़ने के रूप में हुआ। इस वारदात में दो मासूम बच्चों के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया। अदालत ने दोषी को उसके अपराध की सजा सुनाने के साथ ही पीड़ित संतानों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए क्षतिपूर्ति की अनुशंसा भी की है। दरअसल मामला जयनगर थाना क्षेत्र के ग्राम आमगांव का है। अभियोजन के मुताबिक, 8 मई 2022 की सुबह जगदीश पैंकरा ने अपनी पत्नी मुन्नी के साथ लकड़ी के फराठी (बत्ता) से मारपीट की थी। हमले में उसके सिर, चेहरे, पैर और जांघ समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। परिजन उसे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल अम्बिकापुर लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
शरीर पर मिले नौ चोटों के निशान, अंदरूनी चोटें भी बनीं मौत की वजह
मृतका के शव का परीक्षण करने वाले चिकित्सक डॉ. संजीव खाखा ने शरीर पर नौ बाहरी चोटों की पुष्टि की थी। जांच में सिर के भीतर रक्त जमा होने, बाईं टांग की हड्डियों में फ्रैक्चर तथा बाएं हाथ के अंगूठे की हड्डी टूटने की जानकारी सामने आई। चिकित्सकीय रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि ये चोटें कठोर एवं भोथरी वस्तु से पहुंचाई गई थीं और मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त थीं।
शराब के नशे में शक और मारपीट से बिगड़ते गए रिश्ते
न्यायालय में सुनवाई के दौरान मृतका के भाई ने पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव की जानकारी दी। उसके अनुसार, मुन्नी अक्सर अपने पति की शराब पीने की आदत, चरित्र पर संदेह करने, मारपीट करने और घर से चले जाने की धमकी देने की शिकायत करती थी। अदालत ने गवाह के इस बयान सहित अन्य परिस्थितियों का भी परीक्षण किया। अभियोजन के अनुसार, घटना वाले दिन विवाद बढ़ने पर आरोपी ने आवेश में आकर पत्नी पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शी नहीं, फिर भी साक्ष्यों की कड़ी से साबित हुआ अपराध
इस प्रकरण में वारदात को अपनी आंखों से देखने वाला कोई गवाह सामने नहीं आया था। ऐसे में अभियोजन के सामने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के जरिए अपराध साबित करने की चुनौती थी। गवाहों के बयान, चिकित्सकीय परीक्षण और फॉरेंसिक जांच को आधार बनाया गया। आरोपी की निशानदेही पर खून लगा लकड़ी का फराठी और जींस पैंट बरामद की गई थी। एफएसएल रिपोर्ट में दोनों वस्तुओं पर मानव रक्त पाए जाने की पुष्टि हुई।घटना के बाद आरोपी का अस्पताल से चले जाना और पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होना भी सुनवाई के दौरान विचारणीय बिंदु रहे। तमाम तथ्यों और परिस्थितियों को जोड़कर न्यायालय ने अभियोजन के पक्ष का परीक्षण किया।
फास्ट ट्रैक न्यायालय ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक न्यायालय) सूरजपुर के पीठासीन अधिकारी आनन्द प्रकाश वारियाल ने प्रकरण में प्रस्तुत प्रत्येक महत्वपूर्ण साक्ष्य का बारीकी से मूल्यांकन किया। बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने गवाहों के कथनों, चिकित्सकीय निष्कर्षों और फॉरेंसिक रिपोर्ट को विश्वसनीय पाया। अंततः हत्या का अपराध संदेह से परे प्रमाणित होने पर जगदीश पैंकरा को दोषी ठहराया गया।
दोनों बच्चों को क्षतिपूर्ति दिलाने की अनुशंसा
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू उन दो बच्चों का भविष्य है, जिन्हें मां के निधन के बाद जीवनभर इस अभाव के साथ आगे बढ़ना होगा। न्यायालय ने उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 396(2) के तहत पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना 2018 के अनुसार उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अनुशंसा की है। इसके लिए निर्णय की प्रमाणित प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर को भेजने का निर्देश दिया गया है।
नशामुक्ति और विधिक जागरूकता के लिहाज से अहम संदेश
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर की ओर से समय-समय पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के बीच यह निर्णय सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। नशे की लत, आपसी अविश्वास और घरेलू हिंसा किस तरह एक हंसते-खेलते परिवार को बिखेर सकती है, आमगांव की यह घटना उसकी गंभीर तस्वीर सामने रखती है। ऐसे हालात में लोगों को नशे से दूर रहने, पारिवारिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने तथा हिंसा के विरुद्ध उपलब्ध कानूनी अधिकारों की जानकारी देने की जरूरत और बढ़ जाती है।एक ओर न्यायालय के निर्णय से हत्या के दोषी को उसके अपराध की सजा मिली, वहीं दूसरी तरफ मां को खो चुके दोनों बच्चों के भविष्य को लेकर आर्थिक सहायता की अनुशंसा भी की गई। कुलमिलाकर यह घटना समाज को आगाह करती है कि नशे और आवेश में उठाया गया हिंसक कदम केवल एक जिंदगी नहीं छीनता, बल्कि अपने पीछे कई जिंदगियों को उम्रभर के संघर्ष और पीड़ा के हवाले कर जाता है। घरेलू विवादों को हिंसा का रूप लेने से रोकना और समय रहते उचित मदद लेना ऐसे हादसों से बचाव की दिशा में जरूरी कदम हैं।
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