मौत बनकर दौड़ी मॉडिफाई ट्रैक्टर-ट्रॉली:कौशलपुर मोड़ पर शिक्षिका की मौके पर मौत, 6 साल का बेटा जिंदगी की जंग में

मौत बनकर दौड़ी मॉडिफाई ट्रैक्टर-ट्रॉली:कौशलपुर मोड़ पर शिक्षिका की मौके पर मौत, 6 साल का बेटा जिंदगी की जंग में
मौत बनकर दौड़ी मॉडिफाई ट्रैक्टर-ट्रॉली:कौशलपुर मोड़ पर शिक्षिका की मौके पर मौत, 6 साल का बेटा जिंदगी की जंग में

ओवरलोड लकड़ी का खेल कब थमेगा..? जिम्मेदारों पर उठे सवाल

सूरजपुर/रामानुजनगर। जिले की सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहीं मॉडिफाई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आखिरकार फिर एक परिवार की दुनिया उजाड़ गईं। गुरुवार दोपहर कौशलपुर मोड़ पर हुए भीषण हादसे में एक शिक्षिका की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका 6 वर्षीय मासूम बेटा गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।दोपहर की सामान्य हलचल अचानक चीख-पुकार में बदल गई। सड़क पर बिखरे सामान, भीड़ और सन्नाटे के बीच हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही सवाल-क्या प्रशासन अगली मौत का इंतजार कर रहा है..?

मोड़ पर मातम: एक झटका… और सब खत्म

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रैक्टर क्रमांक UP12 BW 2352 सूरजपुर से रामानुजनगर की ओर आ रहा था। कौशलपुर के खतरनाक मोड़ पर चालक ने नियंत्रण खो दिया और सड़क किनारे खड़ी स्कूटी को रौंदते हुए आगे बढ़ गया।स्कूटी पर सवार शिफा त्रिपाठी (पति-केदारपाल), मूल निवासी रायपुर थीं। वे स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल भुवनेश्वरपुर में शिक्षिका थीं। टक्कर इतनी भीषण थी कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला-मौके पर ही उनकी सांसें थम गईं।उनका 6 वर्षीय पुत्र गंभीर रूप से घायल है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिकल कॉलेज अम्बिकापुर रेफर किया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।विद्यालय में शोक की लहर है। छात्र-छात्राएं अपनी मैडम को याद कर फफक पड़े। बताया गया कि वे संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुलसचिव की पुत्री थीं।एक बेटी, एक मां, एक शिक्षिका-इस हादसे ने कई रिश्तों को एक साथ तोड़ दिया।

ओवरलोड लकड़ी का खुला खेल: किसके संरक्षण में...?

जिले में यूकेलिप्टस समेत अन्य लकड़ियों की संगठित कटाई और क्षमता से कई गुना ज्यादा लादकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का परिवहन कोई नई बात नहीं। ट्रॉलियों को मॉडिफाई कर उन्हें चलता-फिरता ट्रक बना दिया गया है।गांव-गांव और मुख्य मार्गों पर ये वाहन बेधड़क दौड़ते हैं। न मोड़ों पर चेतावनी संकेत, न पर्याप्त स्पीड ब्रेकर-ऊपर से ओवरलोडिंग।स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि शिकायतें हुईं, खबरें छपीं, लेकिन कार्रवाई कागजों तक सिमट गई।अब सवाल सीधा है कि क्या वन विभाग, परिवहन विभाग और पुलिस को यह सब नजर नहीं आता..?क्या नियम सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं..?क्या हर हादसे के बाद सिर्फ एफआईआर दर्ज कर इतिश्री कर ली जाएगी..?

सिर्फ केस दर्ज… या सिस्टम में सुधार..?

घटना के बाद पुलिस ने ट्रैक्टर जब्त कर चालक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया है। जांच जारी है।लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है-हमें कागजी कार्रवाई नहीं, स्थायी समाधान चाहिए। इसके साथ ही प्रमुख मांगें में मुख्य रूप से कौशलपुर मोड़ पर तत्काल स्पीड ब्रेकर व चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं,ओवरलोड लकड़ी परिवहन पर विशेष अभियान चलाया जाए,मॉडिफाई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की जांच कर सख्त कार्रवाई हो और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। बहरहाल लोग दिवंगत आत्मा की शांति और घायल बालक के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना कर रहे हैं। लेकिन इस बार स्वर अलग है-अब और नहीं… सड़क पर दौड़ती मौत को रोकना ही होगा।क्योंकि अगर हर हादसे के बाद सिर्फ शोकसभा हो और सिस्टम न बदले, तो अगली खबर फिर किसी उजड़े घर की ही होगी… और यह सवाल फिर गूंजेगा।

उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन: 5 जगह ब्रेकर की मांग

पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष जय प्रकाश उपाध्याय ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव को ज्ञापन सौंपकर रामानुजनगर रेलवे ब्रिज से शिवपुर नाला तक घुमावदार सड़क पर 5 स्थानों पर गति रोधक (ब्रेकर) बनाने या सड़क को सीधा करने की मांग की है।ज्ञापन में जिन स्थानों का उल्लेख उनमें एम.पी. ट्रैक्टर के पास, सोस इन्फ्रा स्कूल मोड़, शिवनाथ साहू घर के पास, भारत पेट्रोलियम के पास और आशा फ्युल्स के पास का उल्लेख किया है साथ ही उन्होंने कलेक्टर सूरजपुर और लोक निर्माण विभाग को भी प्रतिलिपि भेजी गई है।