पत्नी की हत्या कर खुद ही पहुंचा चौकी… झूठी कहानी रची, लेकिन पुलिस ने सच उधेड़ दिया

पत्नी की हत्या कर खुद ही पहुंचा चौकी… झूठी कहानी रची, लेकिन पुलिस ने सच उधेड़ दिया

सूरजपुर।कभी-कभी अपराधी अपने ही बुने जाल में ऐसा उलझ जाता है कि सच की एक किरण पूरी कहानी को चीरकर बाहर आ जाती है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सूरजपुर जिले के सलका-उमेश्वरपुर चौकी क्षेत्र से सामने आया है, जहां पत्नी की हत्या कर आरोपी पति खुद ही रिपोर्ट लिखवाने पहुंच गया—मगर पुलिस की बारीक जांच ने उसकी “झूठी पटकथा” को बेनकाब कर दिया।

“सो रही थी…” से शुरू हुई कहानी, मौत पर खत्म

ग्राम तारकेश्वरपुर निवासी अलमा प्रजापति ने 4 मार्च को चौकी में सूचना दी कि उसकी पत्नी लीलावती घर में मृत पाई गई। उसने दावा किया कि वह एक दिन पहले सामान लेने बाहर गया था और लौटकर देखा कि पत्नी जमीन पर पड़ी है—उसे लगा वह नशे में सो रही है।लेकिन सुबह जब उठाया, तो उसकी सांसें थम चुकी थीं।मर्ग जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। वजह—पति का दूसरी महिलाओं से बातचीत करना, जिस पर पत्नी आपत्ति जताती थी।शक, झगड़ा और हिंसा… धीरे-धीरे यह रिश्ता भरोसे से ज्यादा तनाव का घर बन चुका था। हत्या के बाद आरोपी ने खुद को बचाने के लिए एक “साधारण मौत” की कहानी गढ़ी और अगले दिन चौकी पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई।लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की सख्त पूछताछ के सामने उसका झूठ टिक नहीं सका।पुलिस कि पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि 3 मार्च की रात पत्नी ने फिर चरित्र पर सवाल उठाए।गुस्से में आकर उसने हाथ-पैर, प्लास्टिक पाइप और चाकू से बेरहमी से हमला कर पत्नी की हत्या कर दी।

पुलिस की सटीक कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार

डीआईजी व एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर के निर्देश पर और एसडीओपी बेनार्ड कुजूर के मार्गदर्शन में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की।आरोपी की निशानदेही पर चाकू और पाइप बरामद कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।बताया जा रहा है कि आरोपी पहले से ही क्षेत्र का बदनाम बदमाश रहा है। कुलमिलाकर यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस टूटते रिश्ते की कहानी है जहां संवाद की जगह शक ने ले ली, और गुस्से ने इंसानियत को निगल लिया।एक घर, जो कभी साथ जीने की कसमें लिए था, आज अपराध की दास्तान बन गया।इस कार्यवाही में चौकी प्रभारी सलका उमेश्वरपुर संजय सिंह यादव, प्रधान आरक्षक अजीत प्रताप सिंह, ईश्वर सिंह, आरक्षक राकेश सिंह पोर्ते, रामचंद्र साहू, पंकज राजवाड़े व पिताम्बर सिंह सक्रिय रहे।