न्याय की राह में सुविधाओं और व्यवस्था का भी रखा ध्यान, मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने किया सूरजपुर जिला न्यायालय का निरीक्षण

न्याय की राह में सुविधाओं और व्यवस्था का भी रखा ध्यान, मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने किया सूरजपुर जिला न्यायालय का निरीक्षण

न्यायिक अधिकारियों से लेकर अधिवक्ताओं तक से की सीधी बातचीत, समस्याएं सुनीं और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर हुई चर्चा

सूरजपुर। न्यायालय सिर्फ फैसले सुनाने की जगह नहीं, बल्कि उन लोगों की उम्मीद का केंद्र भी है जो न्याय की आस लेकर वर्षों तक यहां आते हैं। ऐसे में न्याय की प्रक्रिया सहज, सुचारू और आम लोगों के लिए भरोसेमंद बनी रहे, इसके लिए व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा भी जरूरी है। इसी उद्देश्य के साथ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के मुख्य न्यायाधिपति श्री रमेश सिन्हा ने शनिवार को जिला न्यायालय सूरजपुर का निरीक्षण किया।मुख्य न्यायाधिपति के जिला न्यायालय पहुंचने पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री थॉमस एक्का सहित न्यायिक अधिकारियों और न्यायालय परिवार ने आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान माननीय उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल श्री रजनीश श्रीवास्तव तथा संयुक्त रजिस्ट्रार-सह-निजी सचिव श्री एल.वी.एल.एन. भी उपस्थित रहे।निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधिपति ने जिला न्यायालय परिसर में संचालित विभिन्न न्यायालयों के साथ अलग-अलग अनुभागों का जायजा लिया। उन्होंने न्यायालयीन कार्यों के संचालन, उपलब्ध सुविधाओं तथा न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को करीब से देखा। निरीक्षण के दौरान व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को समझने के साथ उन बिंदुओं पर भी ध्यान दिया गया, जिनसे न्यायालयीन कामकाज को और बेहतर बनाया जा सके।इसके बाद जिला न्यायालय के वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में न्यायिक अधिकारियों, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ संयुक्त बैठक हुई। बैठक में न्यायालयीन कार्यों के सुचारू संचालन, आपसी समन्वय तथा न्यायिक अधिकारियों के सामने आने वाली समस्याओं और आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य न्यायाधिपति ने संबंधित विषयों को गंभीरता से सुना और आवश्यक मार्गदर्शन दिया।निरीक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष अधिवक्ताओं से सीधा संवाद भी रहा। मुख्य न्यायाधिपति ने जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं से बार कक्ष में मुलाकात की। उन्होंने न्यायालयीन कार्यों से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए अधिवक्ताओं की समस्याएं और सुझाव सुने। इस दौरान न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी सामने आई।मुख्य न्यायाधिपति के इस निरीक्षण को केवल न्यायालय की व्यवस्थाओं के निरीक्षण तक सीमित नहीं माना जा रहा है। न्यायिक अधिकारियों, प्रशासन और अधिवक्ताओं से सीधे संवाद के जरिए उन्होंने जमीनी स्तर पर सामने आने वाली दिक्कतों को समझने का प्रयास किया। इससे न्यायालयीन व्यवस्था को अधिक सहज, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में आवश्यक मार्गदर्शन मिला।