कभी पानी का इंतजार करते थे खेत, अब लबालब तालाब ने लौटाई किसानों के चेहरों की मुस्कान

कभी पानी का इंतजार करते थे खेत, अब लबालब तालाब ने लौटाई किसानों के चेहरों की मुस्कान

तालाब गहरीकरण से बस्कर में बदली तस्वीर, समय पर हुई धान की रोपाई और गांव में ही मिला रोजगार

सूरजपुर 29 अगस्त 2026।एक समय था जब बस्कर गांव के किसान खेत तैयार करने के बाद आसमान की ओर देखते रहते थे। बादल आते तो उम्मीद बंधती, लेकिन बारिश रूठ जाती तो खेतों में पड़ा रोपा भी सूखने की चिंता सताने लगती। धान की रोपाई में देरी का मतलब था पूरी खेती पर असर। गांव के मजदूरों की मुश्किल भी कम नहीं थी। काम की तलाश में उन्हें घर-गांव छोड़कर दूसरे इलाकों का रुख करना पड़ता था।इस बार हालात बदले हुए हैं। गांव का तालाब पानी से लबालब है। उसके किनारे खड़े होकर देखने पर पानी की लहरों के साथ खेतों में लहलहाता धान भी नजर आता है। जिन खेतों में कभी पानी के इंतजार में काम अटक जाता था, वहां अब समय पर रोपाई हो चुकी है। किसानों के चेहरे पर इस बार चिंता कम और आने वाली फसल को लेकर उम्मीद ज्यादा दिखाई दे रही है।बस्कर में यह बदलाव किसी एक दिन में नहीं आया। तालाब के गहरीकरण ने गांव की तस्वीर धीरे-धीरे बदल दी। जनपद पंचायत भैयाथान क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बस्कर में कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ श्री विजेंद्र सिंह पाटले के निर्देश पर विकसित भारत जी रामजी योजना के तहत तालाब गहरीकरण का कार्य कराया गया। गहराई बढ़ने के बाद तालाब में बारिश का पानी पहले की तुलना में बेहतर ढंग से जमा हो सका। इस मानसून में जब तालाब भरकर लबालब हुआ तो उसका सीधा लाभ आसपास के खेतों तक पहुंचा।किसानों के लिए यह जमा हुआ पानी महज पानी नहीं है। यह समय पर खेती शुरू होने का भरोसा है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले तालाब में पर्याप्त पानी नहीं टिकता था और बारिश पर निर्भरता बनी रहती थी। इसका असर धान की रोपाई पर पड़ता था। इस बार तालाब में पानी होने से खेतों को समय पर पानी मिला और धान की रोपाई भी समय पर हो गई।अब किसानों की नजर अगली फसल पर है। उनका कहना है कि यदि तालाब में पानी लंबे समय तक बना रहा तो रबी सीजन में गेहूं, सरसों और सब्जियों की खेती का रास्ता भी खुलेगा। यानी जिस पानी की कभी एक फसल के लिए कमी पड़ जाती थी, वही पानी अब दूसरी फसल की उम्मीद भी जगा रहा है।

तालाब ने भरी पानी की कमी, योजना ने घरों में पहुंचाया रोजगार

बस्कर में तालाब गहरीकरण की कहानी केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। इस काम ने उन हाथों को भी रोजगार दिया, जिनके लिए गांव में काम मिलना हमेशा आसान नहीं था। योजना के तहत ग्रामीणों को 111 दिनों का रोजगार मिला।गांव के मजदूरों के लिए इसका महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि काम की तलाश में बाहर जाना उनके लिए मजबूरी बन जाता था। घर की जिम्मेदारियां पीछे छूट जाती थीं और रोजी-रोटी के लिए परिवार से दूर रहना पड़ता था। गांव में ही काम मिला तो यह दूरी भी कुछ कम हुई। मजदूरी के लिए बाहर जाने की मजबूरी के बजाय अपने ही गांव में काम करने का अवसर मिला।एक तरफ ग्रामीणों ने तालाब की मिट्टी हटाकर उसकी गहराई बढ़ाई, दूसरी तरफ उसी तालाब ने बारिश का पानी अपने भीतर समेटकर उनके खेतों तक पहुंचाया। मेहनत करने वाले हाथों को रोजगार मिला और खेतों को पानी। कुलमिलाकर बस्कर के लिए तालाब का यह बदलता रूप आने वाले दिनों की एक नई उम्मीद लेकर आया है। पानी रहेगा तो खेत चलेंगे, खेत चलेंगे तो फसल होगी और फसल होगी तो गांव की अर्थव्यवस्था में भी रौनक आएगी। कभी जिस तालाब से पानी की उम्मीद पूरी नहीं हो पाती थी, आज उसी के भरे रहने से किसानों को अपनी अगली फसल की चिंता कम और बेहतर भविष्य का भरोसा ज्यादा नजर आ रहा है।