ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने लिया विकसित भारत गांवों का संकल्प

ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने लिया विकसित भारत गांवों का संकल्प
ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने लिया विकसित भारत गांवों का संकल्प

जन संवाद में ग्रामीणों ने तय की विकास कार्यों की प्राथमिकताएं

दतिमा मोड़/सूरजपुर। गांव के विकास की तस्वीर केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बदलती, उसमें ग्रामीणों की भागीदारी और उनकी जरूरतों की आवाज भी उतनी ही अहम होती है। इसी सोच के साथ भैयाथान जनपद पंचायत क्षेत्र की 78 ग्राम पंचायतों के 90 गांवों में 20 अगस्त को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इन सभाओं में ग्रामीणों ने अपने गांव की जरूरतों पर खुलकर बात की और विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करते हुए विकसित भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी का संकल्प लिया।ग्राम सभाओं में ‘मेरे गांव की प्राथमिकता’ वोटिंग वॉल के माध्यम से ग्रामीणों से संभावित विकास कार्यों में अपनी पसंद दर्ज कराई गई। जल संरक्षण, खेत तालाब, ग्रामीण सड़क, वृक्षारोपण, सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण और आजीविका से जुड़े कार्यों को ग्रामीणों ने प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया। इस पहल से गांव के विकास की जरूरतों को सीधे ग्रामीणों की राय से सामने लाने का प्रयास किया गया।इस दौरान ग्रामीणों ने ‘125 दिन रोजगार-मेरा अधिकार’ की सामूहिक शपथ भी ली। उन्होंने गांव के विकास कार्यों में सक्रिय सहयोग करने और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया। साथ ही विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम, 2025 के तहत रोजगार, पारदर्शिता और जनभागीदारी से जुड़े अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की बात कही।ग्रामसभा में ‘विकसित भारत संदेश कार्ड’ भी वितरित किए गए। प्रत्येक परिवार से अपनी सबसे जरूरी आवश्यकता कार्ड पर लिखने को कहा गया, ताकि गांव की वास्तविक जरूरतें सामने आ सकें। वहीं ‘जनता पूछे-पंचायत बताए’ संवाद मंच के जरिए ग्रामीणों को रोजगार मांगने की प्रक्रिया, मजदूरी भुगतान, शिकायत निवारण और विकास योजनाओं के निर्माण से संबंधित जानकारी दी गई। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं और सवाल भी पूछे।ग्राम सभा के समापन पर ग्रामीणों ने तिरंगा हाथों में लेकर ‘मेरा गांव-मेरा भविष्य, विकसित भारत का मजबूत आधार’ का संदेश दिया। यह दृश्य गांव के विकास को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी और उम्मीद का प्रतीक बना।कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों से शासन की योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग करने की अपील की गई। विशेष ग्राम सभाओं में सरपंच, उपसरपंच, पंच, सचिव, रोजगार सहायक, पंचायत कर्मचारी, स्व-सहायता समूहों के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।ग्राम सभा के जरिए इस बार सिर्फ योजनाओं की जानकारी नहीं दी गई, बल्कि ग्रामीणों को यह अवसर भी मिला कि वे खुद बताएं कि उनके गांव को सबसे पहले क्या चाहिए। विकास की इस प्रक्रिया में गांव की आवाज को केंद्र में रखने की यह पहल आने वाले समय में स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विकास कार्यों को दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।