बालिका गृह की बेटियों के बीच मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनी ‘मन की बात’, सपनों को पंख देने का दिया भरोसा

बालिका गृह की बेटियों के बीच मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनी ‘मन की बात’, सपनों को पंख देने का दिया भरोसा
बालिका गृह की बेटियों के बीच मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनी ‘मन की बात’, सपनों को पंख देने का दिया भरोसा

रायपुर, 30 अगस्त 2026। शासकीय बालिका गृह, शंकर नगर में रविवार को माहौल कुछ अलग था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनने के लिए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े बेटियों के बीच पहुंचीं। कार्यक्रम सुनने के बाद उन्होंने बच्चियों से सहजता से बातचीत की और उनके मन में पल रहे सपनों, उम्मीदों और भविष्य की योजनाओं को जाना। कुछ देर के इस आत्मीय संवाद ने सरकारी बालिका गृह की दीवारों के भीतर अपनत्व और भरोसे का माहौल बना दिया।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण को बालिकाओं के साथ सुना। उन्होंने कहा कि बेटियों के साथ बैठकर देश और समाज से जुड़े विचार सुनना उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम सकारात्मक सोच, नवाचार, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।बातचीत के दौरान मंत्री ने बेटियों को भरोसा दिलाया कि उनके सपनों की राह में परिस्थितियां बाधा नहीं बनेंगी। उन्होंने कहा कि हर बेटी को सुरक्षित माहौल, अच्छी शिक्षा, आगे बढ़ने का अवसर और अपनी पसंद का भविष्य चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। सरकार इसी सोच के साथ बालिकाओं के संरक्षण, शिक्षा और विकास के लिए लगातार काम कर रही है।उन्होंने कहा कि बालिका गृह में रहने वाली बेटियों के लिए यह जरूरी है कि उन्हें केवल सुविधाएं ही नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण भी मिले जहां वे खुलकर अपने सपनों के बारे में सोच सकें। उनका आत्मविश्वास मजबूत हो और जीवन में अपने पैरों पर खड़े होने का हौसला पैदा हो। आवश्यक संसाधन, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना महिला एवं बाल विकास विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है।

‘मन की बात’ सुनने के दौरान बेटियों की उत्सुकता और सहभागिता भी नजर आई। प्रधानमंत्री के विचारों के बीच उनके चेहरों पर भविष्य को लेकर उम्मीद दिखाई दी। इस मौके पर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का संदेश भी साफ था कि हर बेटी की अपनी पहचान हो, उसके सपनों को सम्मान मिले और उसे मंजिल तक पहुंचने का पूरा अवसर मिले।