अंधेरी रात में मवेशियों के गले में चमकेगी उम्मीद की रोशनी, शशांक और सनी ने बांधे रेडियम बेल्ट

अंधेरी रात में मवेशियों के गले में चमकेगी उम्मीद की रोशनी, शशांक और सनी ने बांधे रेडियम बेल्ट
अंधेरी रात में मवेशियों के गले में चमकेगी उम्मीद की रोशनी, शशांक और सनी ने बांधे रेडियम बेल्ट

रामानुजनगर। सड़क पर बेसहारा घूमते मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रामानुजनगर के दो युवाओं ने ऐसी पहल की है, जिसमें इंसान और बेजुबान दोनों की जिंदगी की चिंता दिखाई देती है। रात के अंधेरे में सड़क पर बैठे मवेशी अक्सर वाहन चालकों को नजर नहीं आते और देखते ही देखते हादसा हो जाता है। इसी खतरे को कम करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता शशांक दूबे एवं सनी ने सड़कों पर घूम रहे मवेशियों के गले में रेडियम बेल्ट बांधने का अभियान शुरू किया है।

दोनों युवाओं ने सड़क किनारे और आसपास घूम रहे मवेशियों को चिन्हित कर उनके गले में रेडियम बेल्ट लगाए। वाहन की हेडलाइट पड़ते ही ये बेल्ट चमकने लगेंगे, जिससे अंधेरे में दूर से ही मवेशियों की मौजूदगी का पता चल सकेगा। वाहन चालक समय रहते सतर्क होकर अपनी रफ्तार कम कर सकेंगे और टक्कर की स्थिति से बचने का अवसर मिलेगा।

दरअसल, रामानुजनगर नगर क्षेत्र के साथ ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर दिन ढलने के बाद मवेशियों का जमावड़ा कई बार परेशानी का कारण बन जाता है। दिन में उनकी मौजूदगी आसानी से दिखाई देती है, लेकिन रात में कम रोशनी के बीच यही स्थिति जानलेवा बन सकती है। कई घटनाओं में वाहन चालकों के साथ मवेशी भी घायल होते हैं। ऐसे में रेडियम बेल्ट लगाने की यह पहल भले ही छोटी नजर आए, लेकिन किसी संभावित हादसे को टालने में इसकी भूमिका बड़ी हो सकती है।

शशांक दूबे ने बताया कि सड़क पर घूमते मवेशियों से खतरा केवल वाहन चालकों को नहीं, बल्कि उन बेजुबान जानवरों को भी रहता है। तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने पर उनकी जान तक चली जाती है। इसी चिंता के चलते उन्होंने सनी के साथ मिलकर यह प्रयास शुरू किया है, ताकि रात में गुजरने वाले लोगों को दूर से ही मवेशी दिखाई दें और दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने लोगों से अपने पशुओं को खुले में सड़कों पर नहीं छोड़ने की अपील की। साथ ही बेसहारा पशुओं के नजर आने पर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सहयोग करने का आग्रह किया।

स्थानीय लोगों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के लोग भी अपने स्तर पर छोटी-छोटी सावधानियां बरतें तो कई अनहोनी को रोका जा सकता है। शशांक दूबे और सनी की पहल इसी सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल है, जहां किसी सरकारी आदेश या इंतजार के बजाय दो युवाओं ने खुद आगे बढ़कर रास्ते पर खतरा बने बेजुबानों की सुरक्षा का बीड़ा उठाया है। कुलमिलाकर यह प्रयास एक साथ दो जिंदगियों की चिंता करता है। सड़क पर निकलने वाले इंसान की भी और उसी सड़क पर अनजाने में पहुंच जाने वाले उस बेजुबान जीव की भी। अंधेरे में चमकता रेडियम बेल्ट शायद एक छोटी सी रोशनी है, लेकिन किसी परिवार को हादसे के दर्द से और किसी पशु को असमय मौत से बचाने के लिए यही रोशनी काफी साबित हो सकती है।