लुधियाना से एम्बुलेंस में बेहोशी की हालत में घर पहुंचा 17 वर्षीय युवराज, शाम को मौत; आदिवासी समाज ने मांगी FIR और मुआवजा

लुधियाना से एम्बुलेंस में बेहोशी की हालत में घर पहुंचा 17 वर्षीय युवराज, शाम को मौत; आदिवासी समाज ने मांगी FIR और मुआवजा

परिजनों की सहमति के बिना काम पर ले जाने और मजदूरी नहीं देने का आरोप, सर्व आदिवासी समाज ने कमिश्नर-आईजी को ज्ञापन सौंपकर FIR व मुआवजे की मांग की

बलरामपुर/अम्बिकापुर।17 साल का युवराज सिंह रोजी-रोटी के लिए घर से दूर लुधियाना गया था। परिवार को उम्मीद थी कि काम करके लौटेगा तो घर की जरूरतें कुछ आसान होंगी, लेकिन तीन महीने बाद वह जब वापस आया तो होश में नहीं था। एम्बुलेंस से गांव पहुंचा युवराज कुछ घंटे बाद ही हमेशा के लिए परिवार को छोड़ गया। अब उसकी मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।मामला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम चेरा का है। मृतक युवराज सिंह पिता सुदामा सिंह, माता शिवकुमारी, जाति खैरवार (अनुसूचित जनजाति), उम्र 17 वर्ष, ग्राम चेरा, चौकी डिण्डो, तहसील रामचन्द्रपुर का रहने वाला था।सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग (छत्तीसगढ़) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर सरगुजा संभाग और आईजी सरगुजा संभाग, अम्बिकापुर को ज्ञापन सौंपा है। प्रदेश उपाध्यक्ष उदय कुमार पण्डो के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में ठेकेदारों के खिलाफ FIR दर्ज करने और परिवार को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की गई है।

तीन महीने पहले पंजाब ले गए, मजदूरी नहीं देने का आरोप

समाज और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप के मुताबिक, ग्राम महादेवपुर निवासी लक्ष्मी यादव और उत्तर प्रदेश के दुद्धी निवासी शशिकांत युवराज को करीब तीन महीने पहले लुधियाना ले गए थे। वहां उसे पाइप लाइन के काम में लगाया गया। परिवार का आरोप है कि नाबालिग होने के बावजूद उसे काम पर ले जाया गया और तीन महीने की मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया गया।परिजनों की सहमति के बिना उसे बाहर ले जाने का आरोप भी लगाया गया है।

दोपहर में एम्बुलेंस पहुंची, शाम को घर में मौत

ज्ञापन में बताया गया है कि 5 सितंबर 2026 को दोनों ठेकेदार युवराज को एम्बुलेंस से गांव लेकर पहुंचे। दोपहर करीब चार बजे उसे घर पर छोड़ दिया गया। उस वक्त परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था।शाम को परिजन घर लौटे तो युवराज बेहोशी की हालत में पड़ा मिला। परिवार उसे कुछ समझ पाता, इससे पहले ही करीब सात बजे उसकी मौत हो गई।परिजनों का कहना है कि युवराज की हालत इतनी गंभीर थी तो उसे अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं कराया गया और परिवार को उसकी बीमारी या हालत की जानकारी क्यों नहीं दी गई..? इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है।

'इलाज मिलता तो शायद बच जाता बेटा'

युवराज की मौत के बाद परिवार के सामने सिर्फ बेटे को खोने का दर्द नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है कि आखिर लुधियाना में उसके साथ क्या हुआ था। अगर तबीयत बिगड़ी थी तो समय पर इलाज क्यों नहीं कराया गया और उसे बेहोशी की हालत में घर तक पहुंचाने की जरूरत क्यों पड़ी..?सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है। समाज ने इसे बाल श्रम, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और मानव तस्करी के संभावित पहलुओं से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए जांच की मांग की है।

दो मांगों पर अड़ा समाज

समाज ने प्रशासन के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं। इनमें पहली, दोनों ठेकेदारों और मामले में संलिप्त अन्य लोगों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं दूसरी, मृतक के आदिवासी परिवार को नियमानुसार तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन, धरना और प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। कुलमिलाकर युवराज अब नहीं है, लेकिन उसकी मौत कई सवाल छोड़ गई है। परिवार जवाब चाहता है और समाज कार्रवाई। अब यह प्रशासन की जांच पर निर्भर है कि तीन महीने पहले घर से निकले इस किशोर की आखिरी यात्रा की सच्चाई सामने कब आती है।