ड्यूटी के बाद तपस्या का कमाल: योग से रचा इतिहास, सूरजपुर के राम प्रताप राजवाड़े ने चंडीगढ़ में दो कांस्य जीतकर लगातार दूसरे साल राष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया जिले का मान
सूरजपुर।दिनभर मरीजों की देखभाल और जिम्मेदारियों के बीच, जब अधिकांश लोग थककर विश्राम ढूंढते हैं, उसी समय सूरजपुर का एक स्वास्थ्यकर्मी अपने भीतर की ऊर्जा को साधने निकल पड़ता है। यह कहानी है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भटगांव में पर्यवेक्षक पद पर कार्यरत राम प्रताप राजवाड़े की, जिन्होंने योग साधना को जीवन का हिस्सा बनाकर राष्ट्रीय मंच पर जिले का नाम रोशन कर दिया।चंडीगढ़ में आयोजित ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज योगासन प्रतियोगिता 2025-26 में राजवाड़े ने 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में आर्टिस्टिक सोलो और रिदमिक पेयर-दोनों इवेंट में कांस्य पदक हासिल किए। देशभर से आए प्रतिभागियों के बीच उनका संतुलन, लय और एकाग्रता किसी साधक की मौन कविता जैसी नजर आई।इस उपलब्धि के पीछे केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि अनुशासन की वह निरंतर धारा है, जो वर्षों से बह रही है। इससे पहले वर्ष 2024-25 की इसी प्रतियोगिता में उन्होंने ट्रेडिशनल सोलो में स्वर्ण और आर्टिस्टिक सोलो में रजत पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। यानी लगातार दो वर्षों में चार राष्ट्रीय पदक—एक ऐसा सफर, जिसमें हर आसन के साथ एक नई ऊंचाई जुड़ती गई।राज्य स्तर पर चयन के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ के खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ट्रायल में अपनी जगह बनाई और फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी साधना का प्रमाण दिया। केंद्रीय सिविल सेवा सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा बोर्ड द्वारा उन्हें पदक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।राम प्रताप राजवाड़े की यह सफलता सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो कहती है कि सीमाएं समय की नहीं, संकल्प की होती हैं। सरकारी सेवा की व्यस्त दिनचर्या के बीच भी उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि मन स्थिर हो, तो शरीर हर सीमा पार कर सकता है।उनकी इस उपलब्धि पर जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समाज के विभिन्न वर्गों में खुशी की लहर है। सूरजपुर का यह साधक अब सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि प्रेरणा का वह दीप बन चुका है, जिसकी रोशनी दूर तक जाएगी।