“पसीने की हर बूंद अब बनेगी इतिहास” — सूरजपुर के बेटों-बेटियों ने सरगुजा ओलम्पिक के फाइनल में रची उम्मीद की नई कहानी

“पसीने की हर बूंद अब बनेगी इतिहास” — सूरजपुर के बेटों-बेटियों ने सरगुजा ओलम्पिक के फाइनल में रची उम्मीद की नई कहानी
“पसीने की हर बूंद अब बनेगी इतिहास” — सूरजपुर के बेटों-बेटियों ने सरगुजा ओलम्पिक के फाइनल में रची उम्मीद की नई कहानी

 सूरजपुर। अम्बिकापुर की धरती इन दिनों सिर्फ खेल का मैदान नहीं, बल्कि सपनों की कसौटी बनी हुई है। सरगुजा ओलम्पिक 2026 में सूरजपुर जिले की वॉलीबाल टीमों ने जो प्रदर्शन किया है, वह केवल जीत की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और अदम्य जज़्बे का जीवंत उदाहरण बन गया है।सीनियर बालक और बालिका टीमों ने कोरिया और बलरामपुर जैसी मजबूत टीमों को 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। लेकिन इस जीत के पीछे सिर्फ स्कोरलाइन नहीं, बल्कि अनगिनत सुबह की मेहनत, धूल भरे मैदानों में बहा पसीना और हार न मानने की जिद छुपी है। हर स्मैश में एक सपना था, हर ब्लॉक में उम्मीद, और हर अंक में पूरे जिले की धड़कनें शामिल थीं।जूनियर वर्ग में भी सूरजपुर ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। बालिका टीम ने फाइनल में प्रवेश किया, जबकि बालक टीम सेमीफाइनल तक पहुंचकर यह साबित कर चुकी है कि आने वाला समय सूरजपुर का है। बलरामपुर और एमसीबी की टीमों को हराना सिर्फ जीत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का वह शंखनाद है, जिसने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया। उक्ताशय पर जिला एमेच्योर वॉलीबाल संघ के अध्यक्ष अजय गोयल ने इसे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता उन बच्चों की है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को कभी छोटा नहीं होने दिया।जिला सचिव रामश्रृंगार यादव ने कहा कि खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते।कोच राजनाथ गुप्ता ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि फाइनल सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि उन सपनों का मंच है, जिन्हें उन्होंने वर्षों से अपने दिल में संजोया है। बहरहाल इस सफलता के पीछे कोच हेमन्त राजवाडे, दिनेश कुमार साहू, आशा प्रसाद रजक और मैनेजर सोनू सिंह, भुवन सिंह, रविन्द्र सिंह, श्रीमती लालमनि राजवाडे सहित पूरी टीम का अथक प्रयास है। संघ पदाधिकारी संतोष सिंह, पंकज गर्ग एवं क्षेत्रवासियों की आंखों में आज गर्व और उम्मीद दोनों झलक रहे हैं। कुलमिलाकर अब जब फाइनल की घड़ी करीब है, तो यह सिर्फ एक खेल नहीं रहेगा। यह उन माता-पिता के सपनों की परीक्षा होगी, जिन्होंने अपने बच्चों को हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की सीख दी…यह उन कोचों के विश्वास की परीक्षा होगी, जिन्होंने हर गिरावट के बाद खिलाड़ियों को फिर खड़ा किया और यह पूरे सूरजपुर की उम्मीदों की परीक्षा होगी, जो अब इन बेटों-बेटियों के हाथों में सिमट आई हैं।मैदान पर जब अंतिम सीटी बजेगी, तब सिर्फ जीत-हार तय नहीं होगी…बल्कि यह भी तय होगा कि सपनों की उड़ान कितनी ऊंची हो सकती है।