फर्जी अनुज्ञा का खेल: 15 टन लकड़ी पकड़ी, तीन पर एफआईआर… पर सवालों के घेरे में प्रशासन की निगरानी

फर्जी अनुज्ञा का खेल: 15 टन लकड़ी पकड़ी, तीन पर एफआईआर… पर सवालों के घेरे में प्रशासन की निगरानी

सूरजपुर।जिले में लकड़ी तस्करी का जाल अब इतना गहरा हो चुका है कि फर्जी अनुज्ञा पत्र के सहारे खुलेआम 15 टन लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल लंबे समय से जारी था, लेकिन प्रशासन की नींद तब खुली जब मामला पकड़ में आया। अब कार्रवाई की बात हो रही है, मगर बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह स्थिति बनी कैसे..?सूत्रों की मानें तो पड़ोसी राज्यों से आए लकड़ी तस्कर स्थानीय नेटवर्क और कथित संरक्षण के दम पर गांव-गांव तक अपनी पैठ बना चुके हैं। पहले भी इनकी गतिविधियां उजागर हुईं, लेकिन जिम्मेदारों का रवैया ढिलमुल ही रहा। नतीजा यह हुआ कि अब तस्करों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने फर्जी अनुज्ञा पत्र बनाकर सिस्टम को ही चुनौती दे डाली।आने वाले दिनों में ही तय होगा कि एफआईआर की यह कार्रवाई सिस्टम की सफाई है या सिर्फ छवि सुधारने की कवायद।

17 मार्च को खुला राज

ग्राम रामानुजनगर में जांच के दौरान ट्रक (CG 12 BB 1429) से करीब 15 टन लकड़ी जब्त की गई। चालक राजेश यादव द्वारा प्रस्तुत अनुज्ञा पत्र जांच में पूरी तरह फर्जी पाया गया। कार्यालयीन अभिलेखों में ऐसा कोई दस्तावेज जारी ही नहीं हुआ था।प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लकड़ी सूरजपुर से रायपुर जिले के खरोरा स्थित प्लाईवुड फैक्ट्री ले जाई जा रही थी। इस पूरे मामले में संग्रहण केंद्र संचालक आजम खान, बृजनारायण साहू और चालक राजेश यादव की संलिप्तता पाई गई है। तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और वाहन सहित लकड़ी जब्त कर थाना रामानुजनगर में रखा गया है।

कार्रवाई के बाद उठे असली सवाल

प्रशासन अब सख्ती की बात कर रहा है, लेकिन कई सवाल हवा में तैर रहे हैं—क्या यह अवैध कारोबार बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव था..?

पहले मिली शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई..?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भी जांच होगी या मामला सिर्फ एफआईआर तक सीमित रहेगा..?

कागजों में सख्ती, जमीन पर ढील..?

कलेक्टर एस. जयवर्धन ने सख्त कार्रवाई और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी कह रही है। यदि समय रहते निगरानी मजबूत होती, तो शायद फर्जी दस्तावेजों के सहारे इतना बड़ा अवैध परिवहन संभव ही नहीं होता।

अब नजर अगले कदम पर

फिलहाल कार्रवाई से प्रशासन अपनी सक्रियता दिखाने की कोशिश में है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी कागजी कार्रवाई तक सिमटकर रह जाएगा।