रक्षासूत्र ने जोड़ा पुलिस और समाज का रिश्ता, एकल अभियान की बहनों ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी

रक्षासूत्र ने जोड़ा पुलिस और समाज का रिश्ता, एकल अभियान की बहनों ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी
रक्षासूत्र ने जोड़ा पुलिस और समाज का रिश्ता, एकल अभियान की बहनों ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी

पुलिसकर्मियों को राखी बांधकर मनाया रक्षाबंधन, सुरक्षा का भरोसा देने वाले जवानों के प्रति जताया सम्मान

सूरजपुर। रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं, बल्कि भरोसे और सुरक्षा के उस भाव का भी पर्व है, जिसमें एक धागा दिलों को जोड़ देता है। इसी भावना के साथ एकल अभियान संच गणेशपुर, प्रेमनगर की बहनों और महिला समिति ने पुलिस जवानों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनके प्रति सम्मान और अपनापन जताया।

26 अगस्त को पुलिस थाना प्रेमनगर और 30 अगस्त को पुलिस चौकी उमेश्वरपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एकल अभियान की बहनों ने वहां पदस्थ पुलिसकर्मियों को राखी बांधी और मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं। दिन-रात लोगों की सुरक्षा में जुटे जवानों की कलाई पर जब रक्षासूत्र बंधा तो माहौल में अपनत्व और भावनाओं की एक अलग ही तस्वीर दिखाई दी।

इसी क्रम में आचार्य मासिक बैठक के दौरान उपस्थित आचार्य भाइयों और समिति सदस्यों की कलाई पर भी रक्षासूत्र बांधकर पर्व मनाया गया। कार्यक्रम में एकल अभियान के आचार्य, आचार्या, भैया-बहन, संच सेवा व्रती हरिहर प्रसाद राजवाड़े, मंगल देव टेकाम, संच व्यास श्रीमती सविता राजवाड़े, अंचल पालक किताब सिंह पैकरा, अंचल समिति के बृजेश राजवाड़े सहित संच समिति के परमानंद राजवाड़े, श्रवण कुमार साहू, मोहन राजवाड़े, संतलाल राजवाड़े, राजेश्वर यादव और खेलसाय राजवाड़े उपस्थित रहे।

महिला समिति की ओर से श्रीमती कविता साहू, श्रीमती कमला साहू, श्रीमती कांती देवी और श्रीमती अमरमती की भी महत्वपूर्ण सहभागिता रही।

इस अवसर पर अंचल समिति के बृजेश राजवाड़े, संच समिति के श्रवण कुमार साहू और अंचल पालक किताब सिंह पैकरा ने रक्षाबंधन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं है। यह एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने, समाज की सुरक्षा और आपसी विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है।

एकल अभियान की बहनों और महिला समिति के इस प्रयास ने रक्षाबंधन को एक भावनात्मक रूप दे दिया। जिन जवानों पर समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं की कलाई पर जब बहनों ने राखी बांधी तो यह रिश्ता खून का नहीं, बल्कि भरोसे और सम्मान का नजर आया।