विकास के दावों के बीच प्यास की कड़वी हकीकत: तीन महीने से बंद सोलर पंप, धंसे कुएं से पानी भरने की मजबूरी बरकरार
रस्सी-बाल्टी के सहारे धंसे कुएं से पानी निकाल रहे मासूम, गंदा पानी छानकर पीने को मजबूर ग्रामीण: हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन..?
ओड़गी। सरकार और जिला प्रशासन गांवों में विकास और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन इन दावों के बीच सूरजपुर जिले के ओड़गी ब्लॉक की ग्राम पंचायत बेदमी के नवापारा से सामने आई तस्वीर जमीनी हकीकत का दूसरा ही चेहरा दिखा रही है। यहां के करीब 22 परिवार और करीब 60 स्कूली बच्चे पिछले तीन महीने से साफ पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।बारिश के मौसम में जब चारों तरफ पानी दिखाई दे रहा है, तब इन परिवारों के लिए पीने का साफ पानी सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। मोहल्ले में ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए लगाया गया सोलर ड्यूल पंप करीब तीन महीने से खराब पड़ा है। यह पंप प्राथमिक शाला के पीछे लगा है और ग्रामीणों के साथ स्कूल के करीब 60 बच्चों के लिए भी पेयजल और निस्तार का प्रमुख सहारा था।पंप बंद होने के बाद ग्रामीणों के सामने निजी कुएं का सहारा लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। रामलखन यादव के इसी निजी कुएं पर करीब 22 परिवार निर्भर हैं। लेकिन लगातार बारिश के कारण कुआं एक तरफ से धंस गया है और उसका पानी भी मटमैला हो चुका है। मजबूरी में ग्रामीण इस पानी को छानकर पी रहे हैं।
किताबों की जगह हाथों में रस्सी-बाल्टी
इस पूरे मामले की सबसे पीड़ादायक तस्वीर स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों की है। जिन हाथों में किताब-कॉपी होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में रस्सी और बाल्टी लेकर बच्चे धंसे हुए कुएं से पानी निकालने पहुंच रहे हैं।कुएं की हालत पहले ही जर्जर है। ऐसे में पानी भरते समय किसी बच्चे का पैर फिसल जाए तो बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। सवाल यह है कि अगर किसी मासूम की जान चली गई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा..?
बारिश के बीच भी बूंद-बूंद पानी को मोहताज
विडंबना यह है कि गांव में बारिश हो रही है, खेत और जंगल पानी से लबालब हैं, लेकिन नवापारा के 22 परिवारों को पीने के लिए सुरक्षित पानी नहीं मिल पा रहा है। मटमैला पानी पीने से जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से सोलर पंप की मरम्मत की मांग कर रहे हैं। ग्राम सभा में भी समस्या उठाई गई, लेकिन अब तक आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।ग्रामीणों का कहना है कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब गांव के आखिरी व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचें। जब बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़े, तब विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दावों और हकीकत के बीच फंसी ग्रामीणों की जिंदगी
सरकार गांवों में पेयजल सुविधा, सोलर पंप और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार योजनाओं और उपलब्धियों की बात करती है। जिला स्तर पर भी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने के दावे किए जाते हैं। लेकिन बेदमी के नवापारा की स्थिति इन दावों के बीच एक कड़वा सवाल खड़ा करती है। करीब तीन महीने से बंद पंप, धंसा हुआ कुआं, मटमैला पानी और रस्सी-बाल्टी के सहारे पानी भरते बच्चे... ये तस्वीरें बताती हैं कि योजनाएं कागज पर भले पहुंच गई हों, लेकिन उनकी रोशनी अभी इस मोहल्ले तक पूरी तरह नहीं पहुंची है।
ग्रामीणों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए खराब सोलर पंप को तत्काल दुरुस्त कराया जाए। साथ ही, पंप चालू होने तक वैकल्पिक रूप से शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीणों को दूषित पानी पीने और बच्चों को जोखिम भरे कुएं से पानी निकालने की मजबूरी से राहत मिल सके।
सीईओ बोले: जल्द होगा समाधान
जनपद पंचायत ओड़गी के सीईओ नीलेश सोनी ने कहा कि ग्रामीणों की पेयजल समस्या को गंभीरता से संज्ञान में लिया गया है। समस्या का अति शीघ्र समाधान कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्रेडा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा रही है, ताकि मौके पर पहुंचकर खराब सोलर पंप का निरीक्षण कराया जा सके और उसे जल्द दुरुस्त कर ग्रामीणों तथा स्कूली बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन का यह आश्वासन कब जमीन पर उतरता है। क्योंकि नवापारा के लोगों के लिए यह सिर्फ पानी की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा सवाल है। बारिश के मौसम में भी अगर बच्चों को पानी के लिए कुएं के मुहाने तक पहुंचना पड़े, तो विकास की असली तस्वीर पर सवाल उठना लाजिमी है।