सुशासन तिहार के बहिष्कार का असर: 11 मांगों की जांच शुरू, अफसरों को मिली जिम्मेदारी

सुशासन तिहार के बहिष्कार का असर: 11 मांगों की जांच शुरू, अफसरों को मिली जिम्मेदारी
सुशासन तिहार के बहिष्कार का असर: 11 मांगों की जांच शुरू, अफसरों को मिली जिम्मेदारी

हाईस्कूल मैदान के अतिक्रमण से लेकर धान घोटाले तक सात दिन में मांगी रिपोर्ट, कार्रवाई नहीं हुई तो भूख हड़ताल की चेतावनी

सूरजपुर/प्रतापपुर।सुशासन तिहार के दौरान उठी जनता की आवाज अब प्रशासनिक फाइलों तक पहुंच गई है। समाधान शिविर के बहिष्कार और जनप्रतिनिधियों के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रतापपुर प्रशासन हरकत में आया है। जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम द्वारा सौंपे गए 11 सूत्रीय मांगपत्र पर एसडीएम प्रतापपुर ने अलग-अलग विभागों को जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपते हुए सात दिनों के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।दरअसल, टुकुडांड में आयोजित समाधान शिविर के दौरान जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। इसी नाराजगी के चलते काली पट्टी और काला झंडा लेकर सुशासन तिहार का बहिष्कार किया गया था। अब उसी आंदोलन का असर दिखाई देने लगा है।सबसे संवेदनशील मुद्दों में प्रतापपुर हाईस्कूल खेल मैदान में कथित अतिक्रमण का मामला शामिल है। आरोप है कि शासन-प्रशासन के संरक्षण में खेल मैदान की भूमि पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। इस मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी तहसीलदार एवं नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को सौंपी गई है।इसके अलावा टुकुडांड सहकारी समिति में 16 हजार बोरी धान की कथित हेराफेरी, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, नल-जल मिशन की खामियां, खराब पड़े सोलर पंप, धान खरीदी में गड़बड़ी, खाद की कालाबाजारी, सहकारी बैंक में किसानों के भुगतान, सीएसआर राशि के उपयोग तथा आदिवासी भूमि पर कथित कब्जे जैसे गंभीर मामलों की जांच के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी दी गई है।एसडीएम द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी अधिकारी मामलों को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समयावधि में जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें, ताकि क्षेत्र में किसी प्रकार की असंतोषजनक स्थिति उत्पन्न न हो।जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि किसानों, आदिवासियों और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिन अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे निष्पक्षता और ईमानदारी से जांच करेंगे। यदि समस्याओं का समाधान होता है तो क्षेत्र के हजारों किसानों और ग्रामीणों को राहत मिलेगी।

निराकरण नहीं होने के आरोप पर किया था बहिष्कार

गौरतलब है कि शुक्रवार को टुकुडांड में आयोजित समाधान शिविर में जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम सहित जनपद सदस्य राजू सिंह, बीफन रजक, रामजनम यादव, बिन्देश्वरी पैंकरा, पानसाय पैंकरा, शिवशंकर पैंकरा, सुमत पैंकरा, हीरालाल पैंकरा, ललित पैंकरा, आदित्य राजवाड़े, प्यारे लाल, शैलेश सिंह, महेंद्र सिंह, राजकुमार पैंकरा, सत्येन्द्र जायसवाल और रामनारायण पटेल समेत अन्य लोगों ने काली पट्टी और काला झंडा लेकर शिविर का बहिष्कार किया था।उनका आरोप था कि सुशासन तिहार के तहत प्राप्त शिकायतों का वास्तविक निराकरण नहीं हो रहा है और जनता केवल आश्वासनों के भरोसे छोड़ दी जा रही है। विरोध के दौरान जमकर हंगामा भी हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी।अब लोगों की निगाहें उन सात दिनों पर टिकी हैं, जिनके भीतर प्रशासन ने जांच रिपोर्ट मांगी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित समस्याओं को इस बार केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी समाधान मिलेगा। क्योंकि जब जनता अपनी पीड़ा लेकर सड़क पर उतरती है, तब उसकी सबसे बड़ी उम्मीद न्याय और जवाबदेही ही होती है।