गौशालाएं सूनी, सड़कों पर मवेशियों का राज... आखिर कब मिलेगी राहत
आम आदमी पार्टी ने गोठान और गौधाम व्यवस्था पर उठाए सवाल, किसानों की फसल, राहगीरों की सुरक्षा और बेसहारा पशुओं के भविष्य को लेकर जताई चिंता
अम्बिकापुर। कभी किसानों की उम्मीद और गौवंश के संरक्षण का आधार बताई गई गोठान व्यवस्था आज सवालों के घेरे में खड़ी नजर आ रही है। खेतों की मेड़ों से लेकर व्यस्त सड़कों तक खुलेआम घूम रहे निराश्रित मवेशी न केवल किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं, बल्कि आम लोगों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए गोठान और गौधाम योजनाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं।
आप के सरगुजा लोकसभा सचिव लव कुमार ने कहा कि वर्ष 2020 में शुरू की गई गोधन न्याय (गोठान) योजना का उद्देश्य आवारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय देना, किसानों की फसलों की रक्षा करना, गोबर खरीदी के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार उपलब्ध कराना था। लेकिन वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश गोठान या तो बंद पड़े हैं या केवल नाममात्र के लिए संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर चारा, पेयजल, पशु चिकित्सा और कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं है।उन्होंने बताया कि मार्च 2026 में राज्य सरकार ने लगभग 1,460 गौधाम स्थापित करने की घोषणा की थी, जिनमें प्रत्येक की क्षमता लगभग 200 पशुओं की बताई गई थी। संचालन और रखरखाव के लिए आर्थिक सहायता का भी दावा किया गया था, लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह योजना धरातल पर प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दे रही है। नतीजतन आवारा पशुओं की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।लव कुमार ने दावा किया कि पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में आवारा पशुओं से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं में 400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में अम्बिकापुर में सांड के हमले में घायल एक महिला की उपचार के दौरान हुई मृत्यु का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह समस्या अब केवल किसानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा का भी बड़ा विषय बन चुकी है।उन्होंने यह भी कहा कि जून 2026 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि गौधाम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि पर्याप्त चारा, पानी, पशु चिकित्सा और कर्मचारियों की उपलब्धता के साथ प्रभावी ढंग से संचालित किए जाएँ। इसके बावजूद जमीनी हालात में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।आम आदमी पार्टी ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश के सभी गोठानों और गौधामों का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण कराया जाए, प्रत्येक केंद्र में स्थायी गोपालक, पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल और पशु चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर विशेष पशु रेस्क्यू दल तैनात किए जाएँ, आवारा पशुओं से फसल क्षति पर किसानों को त्वरित मुआवजा दिया जाए तथा गोठानों और गौधामों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए तो किसान, आम नागरिक और आम आदमी पार्टी प्रदेशभर में लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।