मासूम को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप से मचा हड़कंप, कलेक्टर के निर्देश पर अस्पताल पहुंची जांच टीम

मासूम को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप से मचा हड़कंप, कलेक्टर के निर्देश पर अस्पताल पहुंची जांच टीम
मासूम को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप से मचा हड़कंप, कलेक्टर के निर्देश पर अस्पताल पहुंची जांच टीम

पिता की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय, फार्मेसी से मेडिकल रिकॉर्ड तक खंगाले; अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर

अम्बिकापुर। इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे एक मासूम बच्चे के मामले ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। रामानुजगंज रोड स्थित सिद्धार्थ हॉस्पिटल में करीब साढ़े तीन साल के बच्चे को एक्सपायर्ड Amikacin 250 mg Injection लगाए जाने का आरोप लगाते हुए उसके पिता ने सरगुजा कलेक्टर से शिकायत की है। आवेदन में बताया गया है कि 6 सितंबर 2026 को बच्चे को इंजेक्शन दिया गया, जबकि अगले दिन शीशी देखने पर उसकी Expiry Date अप्रैल 2026 दर्ज मिली।शिकायतकर्ता शख्स खान के अनुसार, उनके बेटे उमैर खान का अस्पताल में उपचार चल रहा था। चिकित्सक की पर्ची पर Amikacin 250 mg Injection लिखे जाने के बाद अस्पताल में दवा दी गई। बाद में जब परिवार की नजर शीशी पर पड़ी तो उस पर Batch No. L-24E-5B, Mfg. Date 05-2024 और Exp. Date 04-2026 अंकित पाया गया। इसके बाद पिता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन का दरवाजा खटखटाया।

शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

मामले को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद सीएचएमओ ने नोडल अधिकारी नर्सिंग होम, ड्रग इंस्पेक्टर और शिशु रोग विशेषज्ञ को शामिल करते हुए टीम गठित की। टीम ने अस्पताल पहुंचकर फार्मेसी सहित इलाज से जुड़ी अन्य गतिविधियों की पड़ताल की।जांच के दौरान दवाओं के स्टॉक, उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित प्रक्रिया को लेकर जानकारी जुटाई गई है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शिकायत में उल्लेखित बैच की दवा अस्पताल तक किस माध्यम से पहुंची, उसकी वैधता समाप्त होने के बाद वह स्टॉक में कैसे बनी रही और यदि वही शीशी बच्चे को दी गई थी तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

CCTV और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

पिता ने प्रशासन से अस्पताल के स्टॉक इश्यू रिकॉर्ड, पेशेंट ट्रीटमेंट रिकॉर्ड, मेडिकेशन एवं इंजेक्शन एडमिनिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, नर्सिंग दस्तावेज और फार्मेसी स्टॉक रजिस्टर की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है। साथ ही 6 सितंबर के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि पड़ताल के दौरान कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित न हो।शिकायत में संबंधित बैच की दवा अस्पताल को उपलब्ध कराने वाले डिस्ट्रीब्यूटर अथवा सप्लायर की जानकारी भी खंगालने का आग्रह किया गया है। इसके अलावा बच्चे के स्वास्थ्य पर कथित रूप से लगाए गए इंजेक्शन का कोई प्रतिकूल असर हुआ है या नहीं, इसके लिए चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञ की राय लेने की मांग रखी गई है।

एक पिता के लिए सबसे बड़ा सवाल बच्चे की सलामती

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू उस पिता की चिंता है, जो अपने छोटे से बेटे को स्वस्थ देखने की उम्मीद में अस्पताल पहुंचा था। दवा की शीशी पर बीत चुकी वैधता देखकर उसके मन में उठे सवाल अब प्रशासनिक जांच का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप की पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल का निरीक्षण कर चुकी है। अब जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि दवा की Expiry Date को लेकर सामने आया मामला महज रिकॉर्ड की गड़बड़ी था या फिर मरीज की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर लापरवाही। कुलमिलाकर इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम बात यही है कि इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले परिवार को दवा की शीशी पर नहीं, व्यवस्था पर भरोसा होना चाहिए। अब जांच उस भरोसे की सच्चाई तलाश रही है।