साइबर ठगी से बचने ग्रामीणों ने उठाया जागरूकता का बीड़ा, सेल्फी लेकर दिया सतर्क रहने का संदेश

साइबर ठगी से बचने ग्रामीणों ने उठाया जागरूकता का बीड़ा, सेल्फी लेकर दिया सतर्क रहने का संदेश

सूरजपुर में ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत गांव-गांव पहुंच रही पुलिस, 2 अक्टूबर तक चलेगा विशेष अभियान

सूरजपुर। मोबाइल की घंटी बजती है, स्क्रीन पर अनजान नंबर दिखता है और दूसरी तरफ से कोई खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई या ईडी का अफसर बताकर डराने लगता है। कुछ ही मिनटों में सामने वाला व्यक्ति इतना भय पैदा कर देता है कि कई लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी तक गंवा बैठते हैं। इसी डर और डिजिटल ठगी के खिलाफ अब सूरजपुर के गांवों में जागरूकता की आवाज बुलंद हो रही है।

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक ‘साइबर जागृति अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में आम लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए ‘जागरूकता की एक सेल्फी’ पहल शुरू की गई है। सूरजपुर जिले में पुलिस की अपील पर ग्रामीण उत्साह के साथ अभियान से जुड़ रहे हैं और सेल्फी लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरों को भी सतर्क रहने का संदेश दे रहे हैं।

पुलिस अधीक्षक आईपीएस योगेश कुमार पटेल के निर्देश पर जिलेभर में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन के मार्गदर्शन में मंगलवार को थाना झिलमिली पुलिस ने ग्राम बभना और चौकी बसदेई पुलिस ने ग्राम बंजा में ग्रामीणों को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी।

क्यूआर कोड स्कैन कर ली सेल्फी, सोशल मीडिया पर दिया संदेश

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने ग्रामीणों को छत्तीसगढ़ पुलिस के आधिकारिक पोस्टर पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर ‘जागरूकता की सेल्फी’ लेने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर अपलोड कर अन्य लोगों से अभियान में शामिल होने की अपील की।

इस पहल का उद्देश्य केवल एक तस्वीर लेना नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की जागरूकता को पूरे परिवार और समाज तक पहुंचाना है। खासकर गांवों में बुजुर्गों और डिजिटल तकनीक का सीमित अनुभव रखने वाले लोगों को साइबर ठगों के जाल से बचाना पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं

पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों से विशेष रूप से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोई अन्य सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती और न ही गिरफ्तारी के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती है।

यदि कोई अनजान व्यक्ति खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर धमकाए अथवा वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाए, तो घबराने के बजाय तुरंत कॉल काट दें। बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी और निजी जानकारी किसी से साझा न करें और डर या दबाव में किसी अज्ञात खाते में रकम न भेजें।

एक छोटी-सी सावधानी बचा सकती है जीवनभर की कमाई

साइबर ठगी में कई बार पीड़ित की वर्षों की मेहनत और बचत कुछ मिनटों में चली जाती है। ऐसे में पुलिस की अपील है कि डरें नहीं, जल्दबाजी न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करें। साइबर ठगी होने या संदेह की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराएं।‘एक सेल्फी से शुरू हुई जागरूकता, किसी परिवार की पूरी जमा पूंजी बचा सकती है।’ यही संदेश लेकर सूरजपुर के गांवों में साइबर जागृति अभियान आगे बढ़ रहा है।