15 दिन में बह गया गोबरी नदी का रपटा पुल, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, कलेक्टर से दो-टूक कहा- 10 दिन में कार्रवाई नहीं तो NH-43 जाम
कलेक्टर के 15 दिन के आश्वासन पर टिकी उम्मीद, सभापति राजू गुप्ता बोले- काम शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीणों संग धरना
सूरजपुर/भैयाथान। जिस पुल से ग्रामीणों को अपने रोजमर्रा के काम, बच्चों को स्कूल और मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने की उम्मीद थी, वह उम्मीद निर्माण के महज 15 दिन बाद ही पानी के तेज बहाव में बह गई। गोबरी नदी पर डबरीपारा (खुटरापारा) में बनाया गया रपटा पुल धराशायी होने से क्षेत्र के लोगों में नाराजगी गहराती जा रही है। बुधवार को बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर रेना जमील को ज्ञापन सौंपकर तत्काल राहत, स्थायी पुल निर्माण तथा जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग रखी।ग्रामीणों ने प्रशासन को 10 दिन का समय देते हुए स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो NH-43 पर डुमरिया स्थित विश्वकर्मा ढाबे के पास शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम किया जाएगा। वहीं, कलेक्टर की ओर से 15 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन मिलने की बात सामने आई है। जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता ने कहा कि निर्धारित समय में काम शुरू नहीं हुआ तो वे ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठेंगे।
पहले मुख्य पुल टूटा, फिर ग्रामीणों ने अपने दम पर उठाया था कदम
गोबरी नदी पर बना मुख्य पुल 30 जून 2025 को पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आवागमन बहाल कराने के लिए शासन-प्रशासन से लगातार मांग की। लंबे समय तक समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने जनसहयोग से स्वयं रपटा पुल बनाने का काम शुरू किया था। इस पहल के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और रपटा पुल निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की शासकीय स्वीकृति दी गई।ग्रामीणों का आरोप है कि जिस निर्माण से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद थी, वह दो सप्ताह भी नहीं टिक सका। अब सवाल केवल एक पुल के टूटने का नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ी जवाबदेही का भी है।
निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, ठेकेदार का भुगतान रोका
ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को कलेक्टर रेना जमील ने 15 दिनों के भीतर धरातल पर काम शुरू कराने का आश्वासन दिया। इस बीच विभागीय स्तर पर यह जानकारी भी सामने आई कि ध्वस्त हुए रपटा पुल का निर्माण करने वाले ठेकेदार का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच विभाग द्वारा बिल रोके जाने की बात कही गई है।हालांकि, निर्माण में वास्तविक खामियों और जिम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगा। ग्रामीणों ने इसी उद्देश्य से विशेषज्ञों के माध्यम से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पुल बहने से स्कूल, खेती और इलाज तक प्रभावित
गोबरी नदी का यह रास्ता आसपास के गांवों के लिए महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा है। पुल के टूटने के बाद स्कूली बच्चों, किसानों, मजदूरों और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। आपात स्थिति में 108 एंबुलेंस के आवागमन को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि रास्ता बाधित होने से हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।प्रतिनिधियों ने बताया कि संभावित खतरे को लेकर 7 जुलाई 2026 को भैयाथान के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को लिखित पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते तो मौजूदा संकट से बचने की संभावना थी।
तीन मांगों पर अड़े ग्रामीण, स्थायी समाधान की मांग
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, टूटे हुए रपटा पुल की तत्काल मरम्मत कर सुरक्षित आवागमन बहाल कराया जाए। दूसरी, बरसात में बार-बार होने वाली परेशानी से निजात दिलाने के लिए गुणवत्तापूर्ण स्थायी पुल का निर्माण स्वीकृत कर जल्द शुरू किया जाए। तीसरी, निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर इस्तेमाल की गई सामग्री, गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की जांच हो तथा दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।ग्रामीणों का कहना है कि हर बरसात में रास्ते बंद होने और फिर आश्वासन मिलने का सिलसिला अब खत्म होना चाहिए। उन्हें अस्थायी मरम्मत के साथ ऐसा स्थायी समाधान चाहिए, जिस पर बरसात के दिनों में भी भरोसा किया जा सके।
आश्वासन की समयसीमा पर टिकी निगाहें, नहीं तो आंदोलन
जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता ने कहा कि ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए प्रशासन को तत्काल पहल करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कलेक्टर द्वारा दिए गए 15 दिनों के आश्वासन के अनुसार काम शुरू नहीं हुआ तो वे ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठेंगे।ज्ञापन के माध्यम से क्षेत्रवासियों ने 10 दिन के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर NH-43 पर आंदोलन की चेतावनी दी है। डुमरिया स्थित विश्वकर्मा ढाबे के पास प्रस्तावित चक्काजाम को लेकर उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल
इस दौरान जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता, ग्राम पंचायत डबरीपारा, बांसापारा और गंगौटी के सरपंच-उपसरपंच सहित नीरज साहू, प्रवीण कुमार साहू, दीप नारायण साहू, जगतपाल सिंह, चंद्रदेव साहू, अवधेश कांशी, लाकेश्वर सिंह मरावी, राजेंद्र यादव, हरिओम नारायण पांडेय, राकेश साहू, रामदत्त पांडेय, लवकेश यादव, मनोज यादव, दीपक साहू, छैला बाबू, कृष्णा यादव, ललन साहू, चीनू गुप्ता समेत अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।