नए आपराधिक कानूनों की समझ से लेकर तकनीकी साक्ष्यों तक, पुलिसकर्मियों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण
आईजी दीपक कुमार झा के नेतृत्व में रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स शुरू, 6 नवंबर तक 1838 विवेचकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य
अम्बिकापुर। बदलते अपराध के तौर-तरीकों के बीच पुलिस की विवेचना को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सरगुजा रेंज में विशेष पहल शुरू की गई है। गंभीर आपराधिक मामलों की जांच में तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल प्रमाणों और नए कानूनों की बेहतर समझ विकसित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ आरक्षक से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स का शुभारंभ किया गया।पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के तहत रक्षित केंद्र अंबिकापुर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के नेतृत्व एवं उपमहानिरीक्षक सह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप विवेचना की बारीकियों से अवगत कराना तथा उनके ज्ञान और कार्यकुशलता को मजबूत करना है, ताकि पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी कमी बाधा न बने।
गंभीर मामलों की जांच में तकनीकी साक्ष्यों पर जोर
रेंज स्तर पर आयोजित तीन दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, मैदानी स्तर पर उनकी समझ, जांच प्रक्रिया तथा विभागीय दायित्वों के कुशल निर्वहन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।प्रत्येक बैच में रेंज की विभिन्न जिला इकाइयों से लगभग 180 अधिकारी-कर्मचारियों को शामिल किया गया है। प्रशिक्षण के लिए इकाई स्तर से आए मास्टर ट्रेनर्स के साथ लोक अभियोजन अधिकारी, फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ, डिजिटल एवं फोरेंसिक टीम के सदस्य, सीसीटीएनएस विशेषज्ञ और साइबर अपराध से जुड़े प्रशिक्षकों को भी शामिल किया गया है। इनके माध्यम से गंभीर मामलों में ई-साक्ष्यों, ई-एफआईआर प्रणाली तथा तकनीकी जांच से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की जा रही है।
6 नवंबर तक 1838 विवेचकों का प्रशिक्षण पूरा करने की तैयारी
पुलिस विभाग के अनुसार, रेंज स्तर पर शेष लगभग 1838 विवेचकों को भी रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण आगामी 6 नवंबर तक निरंतर संचालित कर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक विवेचकों को नए आपराधिक कानूनों और आधुनिक जांच तकनीकों के अनुरूप तैयार करना है, जिससे अपराध की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों का बेहतर उपयोग हो सके।प्रशिक्षण के सुचारू संचालन के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा रितेश चौधरी को नोडल अधिकारी, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (ग्रामीण) राकेश कुमार बधेल को सहायक नोडल अधिकारी तथा रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपूत को समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।शुभारंभ कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, साइबर टीम के विशेषज्ञ तथा रेंज के विभिन्न जिलों से प्रशिक्षण के लिए पहुंचे करीब 180 अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कुलमिलाकर बदलते अपराधों के दौर में पुलिस की जांच क्षमता को मजबूत करने की यह पहल पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने और आपराधिक मामलों में साक्ष्य आधारित विवेचना को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।