पट्टी बंधी आंखों ने खोली भीतर की दृष्टि… विश्रामपुर में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के प्रज्ञा योग ने बच्चों में जगाई अद्भुत चेतना
सूरजपुर।मोबाइल की चमकती स्क्रीन और जंक फूड की चटपटी दुनिया के बीच आज का बचपन कहीं भटक सा गया है। गुस्सा, तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याएं अब बच्चों की उम्र से बड़ी होती जा रही हैं। ऐसे दौर में विश्रामपुर की धरती पर एक नई पहल ने उम्मीद की धीमी लेकिन मजबूत लौ जलाई है।विश्रामपुर में पहली बार ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के तत्वावधान में 15 से 18 अप्रैल तक प्रज्ञा योग एवं इंट्यूशन क्लास का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को भीतर की शक्ति पहचानने का अनोखा अभ्यास कराया गया।इंट्यूशन यानी सही समय पर सही विचार का उदय… इसी मूल मंत्र को आधार बनाकर बच्चों के अंतर्ज्ञान को जागृत करने की दिशा में प्रशिक्षण दिया गया। जब भीतर की चेतना जागती है, तो न सिर्फ पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि गलत आदतों से दूरी भी सहज हो जाती है।इस दौरान प्रशिक्षिका रूपा सिंह एवं शिक्षक राजेंद्र देवांगन ने बच्चों को ब्लाइंड फोल्ड एक्टिविटी के माध्यम से चौंकाने वाले अभ्यास कराए। आंखों में पट्टी बांधकर बच्चों ने रंग पहचाने, अक्षरों को समझा और यहां तक कि किताब पढ़ने का प्रयास भी किया। यह दृश्य उपस्थित अभिभावकों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था।सिर्फ इतना ही नहीं, बच्चों को योगासन और ध्यान के जरिए मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति का भी अभ्यास कराया गया। बंद आंखों से दूसरों के योग आसनों की नकल करना बच्चों के बढ़ते आत्मविश्वास और सजगता का प्रमाण बना।शिक्षकों ने बताया कि यह प्रशिक्षण बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ाने, निर्णय क्षमता को मजबूत करने और सकारात्मक सोच विकसित करने में बेहद कारगर है।कार्यक्रम के अंत तक बच्चों में जो बदलाव दिखा, वह किसी चमत्कार से कम नहीं लगा। अभिभावकों की आंखों में संतोष और चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था।इस दरम्यान विश्रामपुर, सूरजपुर और अम्बिकापुर से आए बच्चों की भागीदारी ने इस आयोजन को एक नई पहचान दी।