मनमानी से त्रस्त सरपंचों का सब्र टूटा: 8 साल से जमे तकनीकी सहायक पर उठे सवाल, कार्रवाई नहीं तो आंदोलन तय
प्रतापपुर।जनपद पंचायत प्रतापपुर के सीईओ की अनदेखी और जिला प्रशासन में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी के कथित संरक्षण के चलते अब पंचायत व्यवस्था पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। ग्रामीण विकास की धुरी माने जाने वाले सरपंच आज खुद ही सिस्टम की उदासीनता से जूझते नजर आ रहे हैं।गांवों के विकास की असली तस्वीर पंचायतों से ही उभरती है, जहां सरपंच और पंच अपने सीमित संसाधनों के बीच भी विकास की नई इबारत लिखने का प्रयास करते हैं। लेकिन जब इन्हीं जनप्रतिनिधियों को व्यवस्था की जकड़न और अधिकारियों की अनदेखी का सामना करना पड़े, तो हालात चिंताजनक हो जाते हैं।ऐसा ही एक मामला प्रतापपुर जनपद पंचायत क्षेत्र से सामने आया है, जहां मनरेगा में पदस्थ तकनीकी सहायक अंकित जायसवाल पिछले 8 वर्षों से एक ही सोनगरा क्षेत्र में जमे हुए हैं। सरपंचों का आरोप है कि उनकी कार्यप्रणाली मनमानीपूर्ण है, जिससे पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनप्रतिनिधियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।पीड़ित सरपंचों ने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन हर बार उनकी आवाज अनसुनी रह गई। हाल ही में सरपंचों ने अपनी समस्याओं को लेकर जनपद पंचायत प्रतापपुर के सीईओ को लिखित आवेदन भी सौंपा है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।सूत्रों के अनुसार, संबंधित तकनीकी सहायक का तबादला इसलिए नहीं किया जा रहा क्योंकि वह जिला प्रशासन में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी का कथित रिश्तेदार बताया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ग्रामीण विकास की पूरी प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है।सरपंचों का कहना है कि यदि जल्द ही इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। बढ़ते आक्रोश के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते समाधान निकालते हैं या फिर स्थिति बिगड़ने के बाद ही जागेंगे। बहरहाल गांवों की उम्मीदें आज भी पंचायतों से जुड़ी हैं, लेकिन जब व्यवस्था ही उनके रास्ते में दीवार बन जाए, तो विकास की रफ्तार थमना तय है।