मिट्टी की सेहत का मंत्र: संतुलित उर्वरक से ही समृद्ध होगा किसान का भविष्य

मिट्टी की सेहत का मंत्र: संतुलित उर्वरक से ही समृद्ध होगा किसान का भविष्य

सूरजपुर।खेत की हरियाली केवल मेहनत से नहीं, समझदारी से भी उपजती है। खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक करने का अभियान तेज कर दिया है। जिले के उर्वरक संग्रहण केंद्रों और सेवा सहकारी समितियों में फ्लेक्स, पोस्टर और मैदानी अमले के जरिए यह संदेश घर-घर पहुंचाया जा रहा है कि खेती अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान का संतुलन भी मांगती है। उक्ताशय पर जारी विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि अक्सर देखा गया है कि किसान यूरिया, डीएपी और पोटाश जैसे उर्वरकों का अधिक उपयोग करते हैं, लेकिन जब खेत एक ही पोषण पर निर्भर हो जाता है, तो उसकी उपजाऊ शक्ति धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है। जैसे शरीर को संतुलित आहार चाहिए, वैसे ही मिट्टी को भी संतुलित पोषण की जरूरत होती है।कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि भूमि की उर्वरकता बनाए रखने, उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने के लिए संतुलित उर्वरकों का उपयोग बेहद जरूरी है। इसके लिए किसानों को डीएपी के विकल्पों सहित विभिन्न उर्वरक समूहों की जानकारी भी दी जा रही है, ताकि वे अपनी फसल की जरूरत के अनुसार सही पोषण प्रबंधन कर सकें। वहीं दूसरी तरफ उप संचालक कृषि, सुश्री संपदा पैकरा ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि वैज्ञानिक पद्धति को अपनाकर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें। यही तरीका है जिससे खेत भी मुस्कुराएगा और किसान की मेहनत भी रंग लाएगी। कुलमिलाकर जब मिट्टी स्वस्थ होगी, तभी फसल समृद्ध होगी और तभी किसान का भविष्य भी सुरक्षित होगा।