“आत्मनिर्भर महिला ही समृद्ध समाज की आधारशिला” — जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणी देवपाल सिंह पैकरा

“आत्मनिर्भर महिला ही समृद्ध समाज की आधारशिला” — जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणी देवपाल सिंह पैकरा

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जिलेभर में उत्साह, महतारी वंदन सम्मेलन में 72 महिलाएं सम्मानित; योजनाओं से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी

सूरजपुर।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सूरजपुर जिले में नारी सम्मान और सशक्तिकरण का उत्सव पूरे जिले में उत्साह, उमंग और गरिमा के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम, तिलसिंवा में आयोजित जिला स्तरीय महतारी वंदन सम्मेलन में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 72 महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि आज की नारी आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की नई पहचान बन चुकी है।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बस्तर से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का वर्चुअल प्रसारण देखा, जहां से महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त जारी की गई। इस दौरान जिले के 2 लाख 11 हजार 965 हितग्राहियों के खातों में राशि का ऑनलाइन अंतरण किया गया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणी देवपाल सिंह पैकरा ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि सूरजपुर की महिलाएं आज आत्मविश्वास, मेहनत और संकल्प के बल पर हर क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा—नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है तो उसके साथ पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है। इसलिए महिलाओं को अवसर देना ही सच्चे विकास की पहली शर्त है।उन्होंने कहा कि शासन की महतारी वंदन योजना, बिहान मिशन और स्वयं सहायता समूह जैसी योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान कर रही हैं। श्रीमती पैकरा ने उन महिलाओं की विशेष सराहना की, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने साहस और परिश्रम से सफलता की नई मिसाल कायम की।अपने संबोधन में उन्होंने समाज से आह्वान किया कि बेटियों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, महिलाओं को निर्णय लेने के अवसर दिए जाएं और लैंगिक भेदभाव को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी मिलकर प्रयास करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल एक दिन का उत्सव नहीं बल्कि समाज की सतत जिम्मेदारी है। वहीं दूसरी तरफ कलेक्टर एस. जयवर्धन ने महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण ही समग्र विकास का आधार है। जिस समाज में महिलाएं शिक्षित, स्वस्थ और आत्मनिर्भर होती हैं, वह समाज प्रगति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ता है।महिला दिवस का उत्साह केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा। जिले के लटोरी, प्रतापपुर, रामानुजनगर-प्रेमनगर, भैयाथान और ओड़गी सहित विभिन्न विकासखंडों में भी महतारी वंदन सम्मेलन और महिला मड़ई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें हजारों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, जागरूकता कार्यक्रमों और महिला अधिकारों पर चर्चा ने इस आयोजन को और अधिक सार्थक बना दिया।कार्यक्रम स्थल पर महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी और स्थानीय पोषक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए, जो आकर्षण का केंद्र बने। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एनीमिया जांच और बीएमआई परीक्षण शिविर भी आयोजित किया गया। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वन, शिक्षा, कृषि और उद्यान विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं और नवाचारों की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई।इसी अवसर पर शासकीय रेवती रमण पीजी कॉलेज में जिला स्तरीय महिला खेल प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें बैडमिंटन, कबड्डी, रस्साकशी, शतरंज और एथलेटिक्स जैसी खेल विधाओं में बालिकाओं और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। खेल मैदान में महिलाओं के आत्मविश्वास और ऊर्जा ने नारी शक्ति की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत की।महिला दिवस के अवसर पर ओड़गी जनपद क्षेत्र से कई प्रेरक कहानियां भी सामने आईं। प्रधानमंत्री आवास योजना से ग्राम बभना की लीलावती चेरवा को पक्की छत मिली तो रामपुर की किस्मत राजवाड़े ने आवास से जुड़ी उद्यमशीलता शुरू कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई। वहीं मनरेगा कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने वाली जयमुनी बाई का नाम डबरी स्थल के सूचना पटल पर दर्ज कर सम्मानित किया गया।इसी तरह ग्राम करवां की सीता जायसवाल स्वयं सहायता समूह से जुड़कर लखपति दीदी बन गई हैं। प्रतिमाह मात्र 50 रुपये की बचत से शुरू हुआ उनका सफर आज किराना दुकान के माध्यम से लगभग 30 हजार रुपये मासिक आय तक पहुंच गया है। कुलमिलाकर महिला दिवस पर आयोजित इन विविध कार्यक्रमों और प्रेरक कहानियों ने यह संदेश दिया कि जब महिलाएं सशक्त और आत्मनिर्भर बनती हैं, तब ही समाज और राष्ट्र के विकास की असली तस्वीर उभरती है।