सबसे दूर… सबसे पहले की दस्तक:जनभागीदारी अभियान से जनजातीय अंचलों में पहुंचेगी शासन की संवेदनाओं की रोशनी
सूरजपुर, 17 मई 2026।जंगलों की पगडंडियों और दूरस्थ पहाड़ी गांवों तक अब शासन की योजनाएं केवल फाइलों में नहीं, बल्कि सीधे ग्रामीणों की चौपाल और देहरी तक पहुंचेंगी। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार जनभागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान 18 मई से 25 मई 2026 तक जिले के जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा। दरअसल धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) अंतर्गत चयनित 284 गांवों में यह विशेष अभियान सेवा, संवाद और संवेदनाओं का नया अध्याय लिखेगा। वर्षों से समस्याओं और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे जनजातीय परिवारों को अब गांव में ही योजनाओं की जानकारी, स्वास्थ्य सुविधा और जनसुनवाई का लाभ मिलेगा।अभियान का उद्देश्य केवल योजनाओं का प्रचार-प्रसार नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े उस व्यक्ति तक शासन की पहुंच सुनिश्चित करना है जिसकी आवाज अक्सर दूरियों में दब जाती थी। इसी भावना के साथ आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत निर्मित आदि सेवा केन्द्रों में विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां ग्रामीण अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के समक्ष रख सकेंगे। प्राप्त शिकायतों का सूचीबद्ध कर उनके त्वरित निराकरण की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी।इस दरम्यान अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक ग्राम में चयनित आदि कर्मयोगी वालंटियरों का पंजीयन 18 मई से पहले पूर्ण करने तथा उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर अभियान को मजबूत आधार देने की तैयारी की जा रही है।गांव-गांव जागरूकता फैलाने हेतु वॉल पेंटिंग, साइकिल रैली और फ्लैग मार्च जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे, ताकि यह अभियान केवल सरकारी आयोजन न रहकर जनसहभागिता का उत्सव बन सके। चयनित गांवों में निवासरत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) एवं अन्य हितग्राहियों को शासन की फ्लैगशिप योजनाओं से शत-प्रतिशत लाभान्वित करने के लिए ग्राम एवं क्लस्टर स्तर पर संतृप्ति शिविर लगाए जाएंगे।प्रदेश में 1 मई से 10 जून तक चल रहे सुशासन तिहार से जोड़कर इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। इस दौरान स्वास्थ्य शिविरों, MMU वाहनों, सिकल सेल जांच, टीबी स्क्रीनिंग तथा ग्रामीण स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सेवाएं गांव-गांव पहुंचेंगी। लाभार्थियों से सीधा संवाद कर योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन भी किया जाएगा।अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पारंपरिक मुखियाओं, स्वयं सहायता समूहों, NSS, NCC, रेडक्रॉस सोसायटी एवं सामाजिक संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित कर इसे सामाजिक सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी का स्वरूप दिया जाएगा।उल्लेखनीय है कि 11 मई से 7 जून 2026 तक देशभर में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, परंपरा और उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है। इसी क्रम में नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने सभी विभागों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभियान को केवल औपचारिकता न मानते हुए जनविश्वास और जनसरोकार का उत्सव बनाया जाए, ताकि दूरस्थ गांवों तक विकास और संवेदनाओं की वह रोशनी पहुंच सके, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था