14 साल से मुआवजे का इंतजार, जमीन भी गई हाथ से, अब परिवार ने दी आत्महत्या की चेतावनी
रेलवे परियोजना में अधिग्रहित 0.09 हेक्टेयर जमीन का 1.77 लाख रुपये मुआवजा अब तक नहीं मिला, कलेक्टर से तत्काल भुगतान की गुहार
सूरजपुर। जमीन चली गई, मुआवजे की राशि स्वीकृत भी हो गई, लेकिन करीब 14 साल बाद भी प्रभावित परिवार के हाथ खाली हैं। सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुके ग्राम नमदगिरी के ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है। परिवार का कहना है कि यदि एक महीने के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया गया तो वे पूरे परिवार के साथ आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और रेलवे प्रबंधन की होगी। उक्ताशय पर मिली जानकारी अनुसार ग्राम नमदगिरी के संतलाल, मुनीलाल, शिवलाल और प्रसोत्तम ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया है कि उनकी ग्राम सूरता तहसील रामानुजनगर में पैतृक भूमि खसरा नंबर 226 में से 0.09 हेक्टेयर जमीन संयुक्त रेलवे लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके एवज में 1 लाख 77 हजार 912 रुपये का मुआवजा अवार्ड पारित किया गया था। बावजूद इसके आज तक प्रभावित परिवार को मुआवजे की राशि नहीं मिल सकी है।आवेदकों के मुताबिक मुआवजा पहले परिवार की बुजुर्ग महिला के नाम से स्वीकृत हुआ था, लेकिन राशि निकालने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद राजस्व अभिलेखों में फौती नामांतरण भी दर्ज किया गया और जमीन का नामांतरण परिवार के अन्य सदस्यों के नाम हो गया। इसके बावजूद मुआवजे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।परिवार का कहना है कि मुआवजे की सूची की प्रति और भुगतान की जानकारी हासिल करने के लिए उन्होंने संबंधित कार्यालयों में कई बार आवेदन और संपर्क किया। हर बार उम्मीद लेकर लौटे, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। दफ्तरों तक आने-जाने में भी परिवार की अच्छी-खासी रकम खर्च हो चुकी है।आवेदन में ग्रामीणों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा है कि जिस जमीन से उनका परिवार जीवन-यापन करता था, वह रेलवे परियोजना में चली गई। मुआवजा नहीं मिलने के कारण वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और अलग-अलग जगहों से कर्ज लेकर गुजर-बसर करने की स्थिति में पहुंच गए हैं।ग्रामीणों ने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कर मुआवजा सूची की प्रति उपलब्ध कराने और स्वीकृत 1.77 लाख रुपये की राशि तत्काल दिलाने की मांग की है। लंबे इंतजार के बाद अब परिवार की उम्मीद जिला प्रशासन के हस्तक्षेप पर टिकी है। आवेदन में की गई आत्महत्या की चेतावनी मामले की गंभीरता को और बढ़ा देती है।