पहली बारिश में ही टूट गई 2.22 करोड़ की नहर, 23 किसानों ने कलेक्टर से लगाई गुहार... ईई के निलंबन और ठेकेदार पर एफआईआर की मांग

पहली बारिश में ही टूट गई 2.22 करोड़ की नहर, 23 किसानों ने कलेक्टर से लगाई गुहार... ईई के निलंबन और ठेकेदार पर एफआईआर की मांग
पहली बारिश में ही टूट गई 2.22 करोड़ की नहर, 23 किसानों ने कलेक्टर से लगाई गुहार... ईई के निलंबन और ठेकेदार पर एफआईआर की मांग

भैयाथान। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई नहर अगर पहली ही बारिश में टूटने लगे, तो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है। ग्राम पंचायत बैजनाथपुर 'ब' में जल संसाधन विभाग की ओर से 2 करोड़ 22 लाख 79 हजार रुपए की लागत से बनाई गई जलाशय नहर की हालत को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। 23 किसानों एवं ग्रामीणों ने 21 सितंबर को जिला कलेक्टर के जनदर्शन में शिकायत सौंपते हुए निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने जिम्मेदार कार्यपालन अभियंता एवं संबंधित अधिकारियों के निलंबन, ठेकेदार पर एफआईआर और पूरे निर्माण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।जनदर्शन टोकन क्रमांक 2250326002085 के तहत दी गई शिकायत में ग्रामीणों ने बताया कि नहर निर्माण कार्य 30 जून 2026 को पूर्ण होना बताया गया है, लेकिन पहली बरसात में ही नहर कई स्थानों पर दरारों के साथ टूटकर बिखर गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस नहर से किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिलने की उम्मीद थी, उसकी कमजोर हालत ने पूरे निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान ही 50 से 60 किसानों और ग्रामीणों ने घटिया कार्य एवं भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए काम बंद कराया था। इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर शिकायत भी की गई थी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कार्यपालन अभियंता एवं संबंधित इंजीनियरों ने शिकायत को निराधार बताते हुए बिना उचित गुणवत्ता जांच के निर्माण कार्य को पास कर दिया।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नहर की खराब स्थिति को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद आनन-फानन में मजदूर लगाकर मरम्मत शुरू करा दी गई। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर केवल ऊपरी सतह पर सीमेंट का घोल लगाया जा रहा है, जबकि नहर की वास्तविक मजबूती और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच नहीं की जा रही है। उनका दावा है कि नहर के ऊपर चलने पर कई जगह धम-धम की आवाज सुनाई देती है, जिससे नीचे से खोखले निर्माण की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि निर्माण की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो नहर एक-दो साल भी टिक नहीं पाएगी और इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा।ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि नहर निर्माण में इस्तेमाल सीमेंट, सरिया और गिट्टी के नमूने लेकर प्रयोगशाला से जांच कराई जाए। कथित अनियमितताओं में संलिप्त कार्यपालन अभियंता, संबंधित एसडीओ और सब इंजीनियर को तत्काल निलंबित किया जाए। दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही, ऊपरी सतह पर की जा रही मरम्मत को तत्काल रोककर पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित होने तक नहर से संबंधित किसी भी कार्य को आगे नहीं बढ़ाया जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई और नहर का गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग, अधीक्षण अभियंता जल संसाधन मंडल अंबिकापुर और अनुविभागीय अधिकारी भैयाथान को भी भेजी गई है।शिकायतकर्ताओं में सोमार साय, द्वारिका गुप्ता, पारसनाथ, जयसंत लाल, अजय गुप्ता सहित ग्राम बैजनाथपुर 'ब' के ग्रामीण शामिल हैं।

नोट: समाचार में उल्लिखित भ्रष्टाचार, मिलीभगत और निर्माण गुणवत्ता संबंधी आरोप ग्रामीणों की शिकायत पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित विभाग का पक्ष इस विवरण में उपलब्ध नहीं है।