छिंदिया की रिटेनिंग वॉल में भ्रष्टाचार की दरारें, पहली बारिश में ढहने का खतरा — जांच नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
सूरजपुर/रामानुजनगर।विकास कार्यों की चमक के पीछे छिपी सच्चाई जब जमीन पर उतरती है, तो तस्वीर अक्सर चौंकाने वाली होती है। ऐसा ही एक मामला रामानुजनगर ब्लॉक के ग्राम पंचायत छिंदिया (छिंदिया–पिवारी मार्ग) में सामने आया है, जहां निर्माणाधीन रिटेनिंग वॉल अब गुणवत्ता की बजाय भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है।जिला कांग्रेस मीडिया प्रभारी अविनाश साहू ने अपने सहयोगी राजू राजवाड़े के साथ निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। मौके पर जो हालात नजर आए, उन्होंने सरकारी दावों की पोल खोल दी। साहू ने आरोप लगाया कि ठेकेदार द्वारा निर्माण के तय मापदंडों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है और सरकारी धन की खुलेआम बंदरबांट हो रही है।निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। निर्धारित 20 मिमी गिट्टी के स्थान पर 40 मिमी से बड़े पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जो तकनीकी मानकों के विपरीत है। शुद्ध बालू की जगह मिट्टी मिश्रित घटिया सामग्री डाली जा रही है। कंक्रीट में सीमेंट की मात्रा इतनी कम है कि दीवार अभी से ही कमजोर और भुरभुरी नजर आ रही है।इतना ही नहीं, ढलाई के दौरान वाइब्रेटर का उपयोग नहीं किया गया, जिससे कंक्रीट के भीतर हवा के खाली स्थान बन रहे हैं। नियमानुसार थर्माकोल जॉइंट भी नहीं दिए गए हैं और सबसे अहम, कंक्रीट की मजबूती के लिए जरूरी तराई (क्योरिंग) की पूरी तरह अनदेखी की गई है।अविनाश साहू ने इस मामले को “कमीशन-राज” का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह दीवार सिर्फ निर्माण की खामी नहीं, बल्कि सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, उससे यह दीवार पहली ही बारिश में ढह सकती है।जिला कांग्रेस ने इस पूरे मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि तत्काल निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए, स्वतंत्र एजेंसी से गुणवत्ता की जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर सख्त कार्रवाई की जाए।साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि दो दिनों के भीतर इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस उग्र जन-आंदोलन करेगी, जिसकी गूंज जिला मुख्यालय से लेकर विधानसभा तक सुनाई देगी। कुलमिलाकर छिंदिया की यह दीवार अब सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं रही, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना बन गई है, जहां विकास की नींव में ही भ्रष्टाचार की दरारें पड़ चुकी हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार जागते हैं या फिर पहली बारिश ही सच्चाई को उजागर कर देगी।