युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष की दौड़ में सचेंद्र पाठक आगे,जमीनी संघर्ष से उभरा चेहरा बन रहा युवाओं की सबसे मजबूत उम्मीद

युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष की दौड़ में सचेंद्र पाठक  आगे,जमीनी संघर्ष से उभरा चेहरा बन रहा युवाओं की सबसे मजबूत उम्मीद

सूरजपुर ।राजनीति की असली कहानी मंचों की रोशनी में नहीं, बल्कि उन पगडंडियों पर लिखी जाती है जहां धूल, संघर्ष और उम्मीद साथ चलते हैं। सूरजपुर जिले के दूरस्थ चांदनी बिहारपुर अंचल से उभरते युवा चेहरा सचेंद्र पाठक आज कुछ ऐसी ही इबारत लिखते नजर आ रहे हैं, जिसकी चर्चा अब गांवों से निकलकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंचने लगी है।आगामी युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद को लेकर जहां कई नाम सामने हैं, वहीं सचेंद्र पाठक की दावेदारी ने युवाओं के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है। समर्थकों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों में पनपा नेतृत्व ही मजबूत होता है, और सचेंद्र उसी मिट्टी से उभरे हैं।बिहारपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्र में पले-बढ़े सचेंद्र पाठक ने बचपन से ही समस्याओं को करीब से देखा और महसूस किया। यही अनुभव उनके सोच और कार्यशैली की नींव बना। उनके लिए राजनीति केवल पद नहीं, बल्कि जनसेवा और बदलाव का माध्यम है।अपने पहले ही चुनाव में यूथ कांग्रेस भटगांव विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरकर उन्होंने करीब 3000 वोट हासिल किए। जीत भले न मिली, लेकिन इसने उनके मजबूत जनाधार और सक्रियता को साबित कर दिया।इसके बाद उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए उन्हें यूथ कांग्रेस छत्तीसगढ़ में संयुक्त राज्य मीडिया समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां उन्होंने पार्टी की विचारधारा को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वर्तमान में वे किसान कांग्रेस सूरजपुर के जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और किसानों, युवाओं तथा ग्रामीण वर्ग के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटे हुए हैं।उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी सशक्त रही है। उनके पिता नित्यानंद पाठक सरपंच, बीडीसी सदस्य और जनपद उपाध्यक्ष जैसे पदों पर रहकर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। यही अनुभव और जनसंपर्क आज सचेंद्र पाठक के बढ़ते जनविश्वास में झलकता है।युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता, निरंतर सक्रियता और संगठन को मजबूती देने की क्षमता के चलते सचेंद्र पाठक युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद के लिए एक मजबूत दावेदार बनकर उभर रहे हैं। कुल मिलाकर, यह केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि उन उम्मीदों की कहानी है जो गांव की मिट्टी से उठकर बदलाव की दिशा तय करना चाहती हैं। सचेंद्र पाठक का यह बढ़ता कदम आने वाले समय में सूरजपुर की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है।