विधायक मद के निर्माण में सवालों के घेरे में शेड, स्वीकृत माप से कम निर्माण का आरोप
कोटया में निर्माणाधीन शेड को लेकर ग्रामीण ने उठाई आवाज, निष्पक्ष तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
सूरजपुर। सरकारी विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के दावों के बीच ग्राम पंचायत कोटया में विधायक मद से निर्माणाधीन शेड को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और निर्धारित मापदंडों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए ग्रामवासी भृगु प्रसाद रजवाड़े ने जनपद पंचायत भैयाथान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।शिकायतकर्ता के मुताबिक, शेड निर्माण से संबंधित स्वीकृत अभिलेखों में कॉलम का माप 9×12 दर्शाया गया है, जबकि मौके पर लगभग 9×9 के माप में निर्माण किए जाने का आरोप है। इसके साथ ही नींव की मजबूती, सरिया के इस्तेमाल, ईंट, गिट्टी, सीमेंट सहित अन्य निर्माण सामग्री की मात्रा और गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों के चलते निर्माण कार्य की तकनीकी शुद्धता और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप काम होने को लेकर संदेह व्यक्त किया गया है।
स्वीकृत प्राक्कलन और मौके के निर्माण का हो मिलान
शिकायत में संबंधित तकनीकी अधिकारी अथवा इंजीनियर से स्थल का भौतिक निरीक्षण कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि स्वीकृत प्राक्कलन, निर्धारित तकनीकी मापदंडों और मौके पर किए गए निर्माण का बारीकी से मिलान किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की वास्तविकता स्पष्ट हो सके।उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि जांच के दौरान निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कॉलम के माप और नींव समेत सभी तकनीकी पहलुओं का सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में अनियमितता अथवा मानकों के विपरीत कार्य की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और शासकीय राशि के नुकसान की स्थिति में वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाए।
सरकारी निर्माण में गुणवत्ता से समझौता न हो
शिकायतकर्ता भृगु प्रसाद रजवाड़े ने कहा कि सरकारी राशि से होने वाला प्रत्येक निर्माण आम जनता के हित से जुड़ा होता है। ऐसे कार्यों में लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता होने पर इसका सीधा असर ग्रामीणों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से जल्द जांच कराकर निष्पक्ष रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।फिलहाल, निर्माण कार्य में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि होना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण स्वीकृत मापदंडों के अनुरूप किया गया है या नहीं।
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