दूसरों के मकान की फोटो लगाकर निकाल ली आवास की किस्त,चन्दरपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़झाला
शासकीय जमीन पर भी निर्माण का आरोप, तहसीलदार ने लगाई रोक
सूरजपुर/सलका।गरीब परिवारों को पक्की छत देने के उद्देश्य से चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। विकासखंड भैयाथान के ग्राम पंचायत चन्दरपुर से सामने आया मामला न केवल योजना की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है, बल्कि उन जरूरतमंद परिवारों की पीड़ा भी सामने लाता है, जो आज भी कच्चे घरों में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।ग्राम चन्दरपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कथित फर्जीवाड़ा, अनियमितता और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिना वास्तविक निर्माण कार्य कराए ही किसी दूसरे व्यक्ति के मकान एवं नींव की तस्वीरें योजना के पोर्टल में अपलोड कर दूसरी किस्त की राशि निकाल ली गई। वहीं अब शासकीय भूमि पर भी आवास निर्माण कराए जाने के आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।ग्राम निवासी विनय कुमार दुबे ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर सूरजपुर, जनपद पंचायत भैयाथान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा तहसील प्रशासन से करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।शिकायत के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास कोड क्रमांक CH147690668 एवं CH147311374 के तहत सोहगिया पति विजय तथा उबार पिता भोगला के नाम से आवास स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि दोनों हितग्राहियों द्वारा मौके पर निर्माण कार्य नहीं कराया गया, बल्कि कथित रूप से पंचायत सचिव एवं आवास मित्र की कथित मिलीभगत से किसी अन्य मकान की तस्वीरें अपलोड कर फर्जी तरीके से दूसरी किस्त की राशि आहरित कर ली गई।ग्रामीणों का कहना है कि मामले की शिकायत 02 मार्च 2026 को ही जनपद पंचायत भैयाथान में कर दी गई थी, लेकिन लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बाद में जांच टीम गठित होने की जानकारी जरूर सामने आई, मगर ग्रामीणों का आरोप है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई और पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया।मामला तब और संवेदनशील हो गया जब यह आरोप सामने आया कि संबंधित हितग्राही शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर प्रधानमंत्री आवास का निर्माण करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि खसरा क्रमांक 334, जो नहर जल संसाधन विभाग की भूमि है, तथा खसरा क्रमांक 335, जो सड़क भूमि के रूप में दर्ज है, वहां निर्माण कराया जा रहा था। जबकि योजना के नियमों के अनुसार केवल निजी भूमि पर ही आवास निर्माण की अनुमति दी जाती है।ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई ऐसे गरीब परिवार हैं, जिनके पास आज भी रहने के लिए सुरक्षित छत नहीं है। बरसात में टपकते घर और गर्मी में तपती दीवारों के बीच लोग जिंदगी काट रहे हैं, लेकिन जिन योजनाओं से उन्हें राहत मिलनी चाहिए, वहीं योजनाएं अब कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही हैं।इसी संबंध में ग्राम पंचायत चन्दरपुर के सरपंच द्वारा तहसील कार्यालय भटगांव में आवेदन प्रस्तुत कर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार भटगांव ने 05 मई 2026 को स्थगन आदेश जारी करते हुए खसरा नंबर 334 एवं 335 पर किए जा रहे निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। साथ ही संबंधित पक्षों को 12 मई 2026 को दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।तहसील कार्यालय द्वारा थाना प्रभारी भटगांव एवं हल्का पटवारी को भी निर्माण कार्य रुकवाने तथा पंचनामा एवं प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, फर्जी तरीके से निकाली गई राशि की वसूली करने तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की मांग की है।अब जिले भर की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि गरीबों के आशियाने से जुड़े इस कथित भ्रष्टाचार पर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा।