साधुराम विद्या मंदिर में गूंजा राष्ट्रभाव का स्वर, संघ शिक्षा वर्ग का शुभारंभ:अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा के संस्कारों से सजेगा पन्द्रह दिवसीय प्रशिक्षण

साधुराम विद्या मंदिर में गूंजा राष्ट्रभाव का स्वर, संघ शिक्षा वर्ग का शुभारंभ:अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा के संस्कारों से सजेगा पन्द्रह दिवसीय प्रशिक्षण

सूरजपुर।राष्ट्र निर्माण की भावना और संगठनात्मक संस्कारों को आत्मसात करने का संकल्प लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पन्द्रह दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष सामान्य साधुराम विद्या मंदिर, सूरजपुर में प्रारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण वर्ग 16 मई से प्रारंभ होकर 1 जून तक चलेगा, जिसमें छत्तीसगढ़ प्रांत के विभिन्न जिलों से आए प्रशिक्षणार्थी राष्ट्रसेवा, अनुशासन और सामूहिक जीवन के मूल्यों का अभ्यास करेंगे।रविवार को आयोजित उद्घाटन सत्र में मध्यक्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल, वर्ग सर्वाधिकारी योगेश्वर प्रसाद सिंह एवं साधुराम विद्या मंदिर के संचालक राहुल अग्रवाल ने भारत माता, डॉ. केशवराव हेडगेवार एवं पूज्य गुरुजी श्री माधवराव गोलवलकर के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। दीप की ज्योति के साथ ही पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति और संगठन चेतना के भावों से आलोकित हो उठा।उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल ने कहा कि सामूहिक जीवन व्यक्ति को अनुशासन, सहनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन को सफल एवं अनुशासित बनाने हेतु समय पालन और कर्तव्य पालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके प्रेरणादायी उद्बोधन ने उपस्थित स्वयंसेवकों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।इस अवसर पर साधुराम विद्या मंदिर के संचालक राहुल अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में देश को संघ की आवश्यकता है। संघ के इस राष्ट्रीय कार्य में सहभागी बनना विद्यालय परिवार के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है।प्रशिक्षण वर्ग में छत्तीसगढ़ प्रांत के सभी जिलों से आए कुल 198 प्रशिक्षणार्थी सहभागिता कर रहे हैं। वहीं गण शिक्षक, व्यवस्था एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने हेतु लगभग 100 स्वयंसेवक पूर्ण समर्पण भाव से सेवाएं दे रहे हैं। पूरे परिसर में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभाव का वातावरण देखने को मिल रहा है। कुलमिलाकर संघ शिक्षा वर्ग का यह आयोजन केवल प्रशिक्षण भर नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, संस्कार और संगठन चेतना की ऐसी साधना है, जहां युवा स्वयंसेवक अपने व्यक्तित्व को निखारते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने का प्रयास कर रहे हैं।