गायत्री खदान में डीजल चोरी का आतंक अवैध पार्किंग से वसूली का खेल सवालों के घेरे में ,खदान की सुरक्षा और वन भूमि पर पार्किंग का धंधा
सूरजपुर। एसईसीएल की गायत्री खदान में डीजल चोरों का दुस्साहस रुकने का नाम नहीं ले रहा। बीते रात खदान परिसर में खड़े करीब 12 से अधिक ट्रकों के टैंकों का ताला तोड़कर अज्ञात चोरों ने हजारों लीटर डीजल चुरा लिया। इस घटना ने न केवल ट्रक मालिकों को लाखों का नुकसान पहुंचाया, बल्कि खदान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि खदान के मुख्य द्वार पर वन विकास निगम की जमीन पर चल रहे अवैध पार्किंग के खेल का पैसा कहां जा रहा है और इसे कौन वसूल रहा है? क्षेत्र में दबी जुबान से यह चर्चा आम है कि इस अवैध वसूली का संबंध खदान में हो रही चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों से हो सकता है। उक्ताशय पर सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार ट्रक चालक रात में वे अपने वाहनों के केबिन में सो रहे थे। सुबह उठने पर टैंकों के ताले टूटे मिले और डीजल गायब था। चालकों का कहना है कि खदान परिसर में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं, फिर भी प्रत्येक ट्रक से 100 रुपये पार्किंग शुल्क के नाम पर वसूले जा रहे हैं। यह राशि कथित तौर पर कुछ स्थानीय लोगों द्वारा वन विकास निगम की जमीन पर अवैध रूप से संचालित पार्किंग के लिए ली जा रही है, जिसे जंगल काटकर मैदान में तब्दील किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह वसूली पूरी तरह गैरकानूनी है और इसकी शिकायतें पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अवैध पार्किंग का धंधा, चोरी से कनेक्शन..?
क्षेत्र के प्रबुद्धजनों का कहना है कि पार्किंग के नाम पर वसूला जा रहा पैसा कहां जाता है, इसकी कोई जवाबदेही नहीं है। दबी जुबान में यह बात उठ रही है कि इस अवैध वसूली का हिस्सा खदान में होने वाली डीजल चोरी और कोयला कबाड़ की चोरी जैसी आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, पार्किंग संचालकों और चोरों के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। खदान की लचर सुरक्षा व्यवस्था और रात में गेट के भीतर होने वाली चोरियां इस शक को और गहरा करती हैं।
कानून का उल्लंघन, वन भूमि का दुरुपयोग
वन विकास निगम की जमीन पर बिना अनुमति के पार्किंग संचालित करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि पर्यावरण नियमों का भी उल्लंघन है। जंगल को काटकर बनाए गए इस पार्किंग स्थल की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन यहां प्रशासन की चुप्पी संदेह पैदा करती है।
प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन पर सवाल
पिछले कई महीनों से गायत्री खदान में डीजल और कोयला चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। ट्रक मालिकों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। खदान प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता के चलते चोर बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि अवैध पार्किंग और चोरी की घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच हो, ताकि वसूली के पैसे का उपयोग और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता का खुलासा हो सके।