आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान का संगम, लाँची बाँध में दिखा संरक्षण का जीवंत उदाहरण

आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान का संगम, लाँची बाँध में दिखा संरक्षण का जीवंत उदाहरण
आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान का संगम, लाँची बाँध में दिखा संरक्षण का जीवंत उदाहरण

सूरजपुर। विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर आज वनमण्डल कार्यालय सभागार, सूरजपुर में वेटलैण्ड (आर्द्रभूमि) संरक्षण को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम "आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान:सांस्कृतिक विरासत का उत्सव” रही, जिसे कार्यशाला के प्रत्येक सत्र में केंद्र में रखा गया।कार्यशाला में डॉ. राजेन्द्र मिश्रा ने वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ-साथ जिला स्तरीय वेटलैण्ड संरक्षण समिति के सदस्यों, स्टेकहोल्डर्स, वेटलेण्ड मित्रों तथा संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्थानीय समुदायों का पारंपरिक ज्ञान, जल-संरक्षण, जैव विविधता और आजीविका से जुड़कर आर्द्रभूमियों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।इस अवसर पर उपवनमण्डलाधिकारी सूरजपुर एवं प्रतापपुर, वनपरिक्षेत्राधिकारी सूरजपुर एवं प्रतापपुर सहित सूरजपुर, रामानुजनगर, प्रतापपुर एवं घुई वनपरिक्षेत्र के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्रतिभागियों को स्थानीय लाँची बाँध ले जाकर मैदानी प्रशिक्षण दिया गया, जहाँ पारंपरिक जल-संरक्षण पद्धतियों और आधुनिक संरक्षण उपायों के समन्वय को प्रत्यक्ष रूप से समझाया गया। कुलमिलाकर कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि आर्द्रभूमियों का संरक्षण केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी है।