पहाड़ी कोरवा महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: सैंटरिंग प्लेट और मिक्सर मशीन से बदली जिंदगी
अम्बिकापुर, 20 जुलाई 2025। छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं ने सरगुजा जिले की विशेष पिछड़ी पहाड़ी कोरवा जनजाति की महिलाओं को आत्मनिर्भरता का नया आयाम दिया है। कभी घरेलू कामों तक सीमित इन महिलाओं ने स्व-सहायता समूहों के जरिए सैंटरिंग प्लेट और मिक्सर मशीन के व्यवसाय से न केवल आर्थिक स्वावलंबन हासिल किया, बल्कि सामाजिक बदलाव की मिसाल भी कायम की। कुलमिलाकर यह कहानी नारी सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की एक प्रेरणादायी तस्वीर है, जो छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर को दर्शाती है।
बिहान योजना से शुरू हुआ बदलाव
अम्बिकापुर विकासखंड के मलंगवा खुर्द ग्राम पंचायत की रामनगर निवासी लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती संगीता पहाड़ी कोरवा बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नई करवट ली। बकरी और मुर्गी पालन से शुरूआत कर उन्होंने बचत की आदत अपनाई, जिसने उन्हें आर्थिक मजबूती दी।
सैंटरिंग प्लेट से आय, आत्मविश्वास में इजाफा
समूह की सचिव श्रीमती सुशीला पहाड़ी कोरवा ने बताया कि सितंबर 2024 में 90 हजार रुपये के लोन से शुरू किए सैंटरिंग प्लेट व्यवसाय ने उनकी किस्मत बदल दी। अब गांव में पीएम आवास निर्माण के लिए सैंटरिंग प्लेट और मिक्सर मशीन किराए पर देने के साथ-साथ वे राजमिस्त्री का काम भी करती हैं। इससे प्रति घर 8 से 9 हजार रुपये की कमाई होती है और अब तक करीब एक लाख रुपये की आय हो चुकी है।
स्व-सहायता समूहों की बड़ी भूमिका
सरगुजा जिला पंचायत सीईओ श्री विनय अग्रवाल ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 31,772 सामान्य और 2,565 जनमन आवास स्वीकृत हुए हैं। निर्माण में तेजी लाने के लिए 413 स्व-सहायता समूहों की 782 महिलाओं को सैंटरिंग प्लेट और मिक्सर मशीन के व्यवसाय से जोड़ा गया। 387 ग्राम पंचायतों में ये महिलाएं आय अर्जित कर रही हैं, जिससे न केवल आवास निर्माण तेज हुआ, बल्कि महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी सुधरी।
महतारी वंदन योजना बनी सहारा
महिलाओं का कहना है कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली मासिक राशि उनकी घरेलू जरूरतों को पूरा कर रही है, वहीं पीएम आवास योजना ने उन्हें पक्का मकान देकर जीवन को स्थायित्व प्रदान किया।
नारी सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल
पहले छोटी-मोटी जरूरतों के लिए तरसने वाली पहाड़ी कोरवा महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की प्रतीक बन चुकी हैं। वे अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताया।